Hindi:
मिथुन लग्न — बारहवें भाव में बुध
मिथुन लग्न वालों के लिए बारहवें घर में बुध शुक्र की वृष राशि में जाकर बैठ जाता है। बारहवाँ घर खर्च का घर है। शुक्र आम तौर पर खर्च शुभ कामों पर ही करवाता है। लेकिन बुध के साथ होने से व्यक्ति का खर्च बहुत बढ़ जाता है और कई बार ये खर्च शुभ की बजाय अशुभ कामों पर ज्यादा होता है। इस बात को समझने के लिए हमें काल-पुरुष कुंडली को ध्यान में रखना होगा।
बारहवें घर में काल-पुरुष कुंडली के अनुसार बृहस्पति की मीन राशि पड़ती है, यहाँ पर बुध नीच है। इसलिए यहाँ वह खर्च शुभ होने की बजाय अशुभ हो जाता है। लाल किताब के अनुसार बारहवाँ घर हमारे मस्तिष्क की अंतर तरंगों तथा हमारी नींद का घर है। यहाँ पर ये बुध अच्छा फल नहीं देता। 1952 की बड़ी लाल किताब में बारहवें बुध का वर्णन करते हुए कहा गया है कि ये किस्मत के फेर से रात की नींद उजाड़ने वाला बन जाता है, जिसे दुखिया देखकर आसमान भी रो दे।
प्राचीन ज्योतिषियों में से लगभग सभी ने बारहवें स्थान पर बैठे बुध को अशुभ ही माना है। आचार्य वराहमिहिर का मत है कि ऐसा व्यक्ति अपने धर्म-कर्म से भ्रष्ट होता है और आचार्य वशिष्ठ के अनुसार ऐसे व्यक्ति की धन हानि होती है। इसी तरह ‘फल दीपिका’ में भी श्री मंत्रेश्वर का मत है कि ऐसा व्यक्ति विद्याहीन तथा अपमानित होता है।
मेरे अपने विचार में उसका विद्याहीन या अनपढ़ होना, ये जरूरी नहीं है। लेकिन वह अपने गलत कार्यों के कारण अपमानित हो, ये बात संभव है। मेरे अपने देखने में आया है कि कभी-कभी जब ऐसा व्यक्ति महत्वपूर्ण कार्य करते समय नीच लोगों की सलाह लेता है तो उसे जरूर नुकसान होता है और उसे अपमानित भी होना पड़ता है।
यह ठीक बात है कि बुध बुद्धि का कारक है, परंतु जब वह इस घर में नीच होकर बैठ जाता है तो उसकी अच्छे विचार वाली खोपड़ी उल्टी हो जाती है। यानी बुनियादी विचार और समझ कायम तो रहती है, पर उसका ठीक इस्तेमाल करना इंसान के वश की बात नहीं रहती।
बारहवें घर का हमारे पूर्व जन्म से भी गहरा संबंध होता है। यहाँ बैठा हुआ बुध ये इशारा करता है कि पिछले जन्म में जवानी से पहले ही उस व्यक्ति की मौत हुई है। मेरे अपने तजुर्बे में ये भी कई बार आया है कि आमतौर पर ऐसा इंसान जिन सगे-संबंधियों के अधीन रहता है, उनकी अपनी आर्थिक हालत ठीक होती है।
लाल किताब में जिक्र आता है कि यदि ऐसा व्यक्ति ससुराल घर में रहे तो ये उसके लिए शुभ फल ही देता है। यदि वह ससुराल घर में न रह सके तो ससुराल से लिए हुए पैसे से या ससुराल से अच्छे संबंध रखने से भी उस व्यक्ति की किस्मत में अच्छा फल मिलता है।
एक दूसरे ग्रंथ ‘हिल्ला जातक’ में कहा गया है कि ये बुध उम्र का इकतालीसवाँ वर्ष जीवन-साथी की मौत का सूचक है। मेरा अपना तजुर्बा है कि केवल बारहवें घर में बुध होने से ऐसा होना संभव नहीं है।
इस पहलू से लाल किताब का फरमान है कि अशुभ बुध होने की हालत में अगर शादी उस व्यक्ति की उम्र के पच्चीसवें वर्ष या इससे पहले हो तो शादी का फल पूरी तरह से खराब हो जाएगा। इस हालत में उस व्यक्ति के पिता पर भी अशुभ प्रभाव पड़ेगा—आर्थिक पहलू से भी और स्वास्थ्य से भी।
इसका हेतु ये है कि बारहवाँ घर बृहस्पति का घर है। उसकी मीन राशि का बृहस्पति पिता का कारक है। शुक्र शादी का कारक है। शुक्र का उम्र पर प्रभाव पच्चीस से सत्ताईस साल तक होता है, लेकिन पच्चीसवें साल शुक्र का जोर पूरे तौर पर प्रभावी होता है। यदि पच्चीसवें साल में शादी हो जाए तो पत्नी का कारक शुक्र स्थापित हो जाएगा और बुध के साथ जब शुक्र भी स्थापित हो जाएगा तो उसका प्रभाव धन के कारक कुबेर अर्थात् बृहस्पति पर बुरा पड़ेगा।
सभी ग्रंथकारों का मानना है कि बुध का इस घर में होना संपूर्ण तौर पर अशुभ है। इसका असर उस व्यक्ति की बहन, बुआ या बेटी, तीनों में से किसी एक पर अशुभ पड़ता है। लेकिन, लाल किताब के अनुसार यहाँ पर एक शर्त जरूर है कि यदि यहाँ बुध के साथ शनि हो तो उस हालत में बुध का अशुभ असर कुछ हद तक कम हो जाता है।
किंतु शनि के सिवाय किसी अन्य ग्रह का बुध के साथ बारहवें घर में होना, बुध के जहरीले प्रभाव को कम नहीं करता, बल्कि उस ग्रह के अपने असर को काफी हद तक अशुभ कर देता है। लाल किताब में इस घर में बैठे बुध को पागल कुत्ता कहा गया है।
अशुभ होने की हालत में ये बुध किसी-न-किसी तरह का डर पैदा किए रहता है। हाँ, ये बात जरूर है कि अगर पच्चीस साल की उम्र के बाद विवाह हो तो ये अशुभ असर काफी हद तक कम हो जाता है। क्योंकि उस हालत में यहाँ पर शुक्र का प्रभाव शुरू हो जाता है और इंसान के घर में जब शादीशुदा बहन, बेटी आए तो वह किसी-न-किसी तरह अशुभ असर ही देगी। लेकिन उसके ससुराल में उसका कोई बुरा प्रभाव साथ जाए, ये कोई जरूरी बात नहीं है।
इस घर में बैठा बुध छठे घर में बैठे ग्रह को अपनी दृष्टि के संबंध से खराब कर देता है। क्योंकि बुध यहाँ काल-पुरुष कुंडली के अनुसार खुद नीच राशि में है और वह अशुभ है, इस कारण उसकी दृष्टि भी अशुभ असर ही देगी।
उदाहरण के तौर पर छठे घर बृहस्पति हो तो बाप की सेहत पर और उसकी दौलत पर अशुभ प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। यदि छठे घर में चंद्रमा हो तो मन की शांति और माता की सेहत के लिए भी इसका प्रभाव अच्छा नहीं रहता।
यदि बारहवें घर में बुध अकेला हो और उस हालत में दूसरा घर खाली हो तो दूसरे घर के प्रतीक यानी मंदिर में जाने से बुध के अशुभ स्वभाव में कुछ शीतलता आ जाती है। यहाँ बुध के अशुभ होने की निशानी है कि किसी मित्र के साथ अकारण ही कोई गलतफहमी पैदा हो जाती है या दाँतों में कोई तकलीफ रहने लगती है।
ऐसी हालत में बारहवें घर के वास्तविक मालिक बृहस्पति को मजबूत करना भी एक शुभ उपाय है। बृहस्पति को शक्तिमान बनाने के लिए इकतालीस दिन लगातार केसर या हल्दी का तिलक लगाना चाहिए।
बुध वास्तव में जब अशुभ होता है तो एक खाली घड़े जैसा होता है। इसलिए लाल किताब में दूसरा उपाय ये बताया गया है कि एक खाली घड़ा बहते पानी में बहाने से भी बुध का बुरा प्रभाव हमसे दूर हो सकता है।
यहाँ पर बुध के साथ बृहस्पति का होना व्यापार आदि के लिए साधारण फल ही देता है। लेकिन व्यक्ति की आयु पर इसका कोई अशुभ असर नहीं पड़ता।
बारहवें घर में बुध के साथ सूर्य का होना अच्छा फल देता है। लेकिन, यदि यहाँ बुध पर कई अशुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ती हो तो इस हालत में बुध की चीजों व रिश्तेदारों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बिना वजह खर्च व परेशानियाँ बढ़ती हैं, जिससे शारीरिक नुक्स, नाड़ियों की खराबियाँ या बेहोशी होने आदि की बीमारी भी हो सकती है। इस प्रभाव को दूर करने के लिए शरीर पर सोने की कोई चीज बहुत शुभ रहेगी, क्योंकि ऐसा करने से बृहस्पति को बल मिलेगा।
यहाँ पर बुध के साथ चंद्र का होना अच्छा फल नहीं देता। क्योंकि बारहवें घर में लाल किताब के अनुसार ‘चंद्रमा खुशी पर काला पर्दा है’ और बुध के साथ होने से चंद्रमा का अपना असर और भी अशुभ हो जाता है, जिससे जातक के मन की शांति और खुशी में विघ्न पड़ते रहते हैं।
यहाँ पर बुध के साथ बैठा हुआ मंगल बुध को काफी हद तक अपनी शक्ति से दबाए रखता है। लेकिन ऐसी हालत में यदि केतु की दृष्टि भी पड़ती हो तो कई दफा आग से जिस्म के किसी हिस्से का जलना या बीमारी आदि की संभावना रहती है।
इस घर में बुध के साथ शुक्र होने से स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ता। किंतु जब उस व्यक्ति की पहली लड़की पैदा होती है तो शुक्र और बुध दोनों का असर अशुभ हो जाता है, जिससे उस व्यक्ति के गृहस्थ सुख में कमी आ जाती है।
यहाँ बुध के साथ शनि का होना बुध के बुरे फल को बहुत हद तक ठीक कर देता है। लाल किताब में इसको आम का दरख्त कहा है। बेशक ये आम खट्टा भी हो, किंतु फिर भी किसी प्रकार से नुकसान का कारक नहीं रहता।
यहाँ पर राहु और बुध का होना बुरा फल देता है। इसका फल औलाद या बहन के लिए अशुभ होता है।
इस घर में बुध के साथ केतु का होना अशुभ है। इससे कई बार शरीर के हिस्से, रीढ़ की हड्डी, पाँव में तकलीफ होने का डर रहता है अथवा पेशाब संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
पूर्व जन्म और पराशक्तियों से संबंध
बारहवें घर में बैठा हुआ बुध ये इशारा करता है कि पिछले जन्म में जवानी से पहले ही उस व्यक्ति की मौत हुई होगी। ऐसी मौत किसी दुर्घटना से तो नहीं होती, आमतौर पर कुदरती मौत ही होती है।
लेकिन यह जरूर है कि पिछले जन्म में उस व्यक्ति के जीवन में कुछ जानने की बड़ी जिज्ञासा थी, जो पूरी नहीं हुई। ये जिज्ञासा पराशक्तियों को जानने की या किसी गलत तरीके से धन कमाने की या जीवन में बहुत ही सम्मान प्राप्त करने की हो सकती है। लेकिन, वह कुछ पूरा होने से पहले ही उस व्यक्ति की मौत हो जाती है।
शायद यही कारण है कि यहाँ बुध कई बार इस स्थान में पराशक्तियों के बारे में एक गहरा विश्वास पैदा करता है। उसके मन में पराशक्तियाँ प्राप्त करने की या पराशक्तियों से धन कमाने की जिज्ञासा भी पैदा हो सकती है।
मैंने कुछ कुंडलियों में देखा है कि बारहवें घर के बुध होने से जो लोग ज्योतिष का काम करते हैं, वह ज्योतिष को अपना धंधा बना लेते हैं और ज्योतिष के उसूलों को भूलकर पराशक्तियों के बारे में बात करते हैं, जैसे—किसी ने आपका काम बाँध दिया है या आप पर किसी प्रेत की बाधा है या आप पर कोई जादू-टोना कर रहा है। इस तरह के वहम पैदा करते हैं।
कुछ कुंडलियों में ये भी देखने में आया है कि बुध यहाँ बैठा हुआ अजीब तरह के सपनों का कारण बन जाता है। उस व्यक्ति को सपनों में किसी अनजानी मृतात्मा का दर्शन होता है। कई बार प्राचीन धर्म-स्थल दिखाई देते हैं और कई बार टूटे-फूटे मंदिर या खंडहरात भी नजर आते हैं। इनमें कई दरगाहें या मस्जिदें भी हो सकती हैं।
इन सपनों को यदि ठीक तरह से समझा जाए तो ये उस इंसान के अभी बीते जीवन पर बहुत रोशनी डाल सकता है। मेरे देखने में आया है कि कई बार ऐसे व्यक्ति अपने बीते जीवन को न समझ पाने के कारण डरते से रहते हैं और इस तरह इनके अवचेतन मन और चेतन की सीमा पर एक धुआँ-सा छाया रहता है।
इसलिए इस जीवन में अंदरूनी और बाहरी दुनिया से बहुत तालमेल नहीं बना पाते और इस वजह से उनकी मानसिक अवस्था डाँवाडोल हो जाती है। कई बार उनमें एक तरह का सीमित पागलपन-सा होता है। वह पागल तो नहीं होते, पर अकारण ही उदासी उन पर, उनके मन की स्थिति पर हमेशा पहुँचती रहती है।
इसी कारण से कई बार इन लोगों में सिर में दर्द रहने की बीमारी का डर भी रहता है या दिमाग की नाड़ियों में किसी प्रकार की तकलीफ भी हो जाती है।
जैसा मैंने अभी जिक्र किया है कि पिछले जन्म के प्रभावों के कारण ऐसे व्यक्ति को पीर-फकीरों पर अंधा विश्वास होता है। वह ऐसे पराशक्तियाँ जानने वाले या पहुँचे हुए साधु-संतों और फकीरों को ढूँढते हैं, जिनके कारण शायद वह इस जीवन में सफल हो सकें।
वह चाहते हैं कि उन्हें कोई पहुँचा हुआ पीर-फकीर या साधु मिल जाए, जिससे उनकी किस्मत पूरी तरह से बदल जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं। जिसकी वजह से उनके मन में एक वहम-सा रहता है, जो उनको जीवन की वास्तविकता और पराशक्तियों के बीच में एक अंधे व्यक्ति की तरह चलने के लिए मजबूर कर देता है।
उनके मन में एक द्वंद्व पैदा होता रहता है तथा उन्हें इस बात की समझ नहीं आती कि वह वास्तव में चाहते क्या हैं?
हमारे एक पुराने ग्रंथ ‘लग्न-चंद्रिका’ में कहा गया है कि इस घर का बुध इंसान को दूसरों के अधीन रखता है। शायद इसका कारण यह है कि कहीं-न-कहीं उनमें पूरी तरह से आत्मविश्वास की कमी रहती है। ये फल-कथन मुझे काफी हद तक ठीक प्रतीत होता है।
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English:
Mercury in the Eleventh House for Gemini Ascendant
For those with a Gemini Ascendant, Mercury is situated in the eleventh house in Aries, a sign ruled by Mars. Due to this influence of Mars on Mercury, the individual reaps significant benefits in life through prudence and hard work. They maintain their courage and do not easily give up in the face of adversity.
According to the *Kaalpurush Kundli* (Universal Horoscope), the eleventh house corresponds to Aquarius, a sign ruled by Saturn. Perhaps this is why many renowned astrologers have noted that the presence of Mercury here brings happiness related to land and property.
Narayan Bhatt and Jivanath, the authors of *Chamatkar Chintamani*, describe the effects of Mercury in this position in a similar vein. They argue that without Mercury in the house of gains (the eleventh house), where would one find financial prosperity? Where would one find charm or freedom from debt? How would one procure the means for a daughter's dowry or wedding? How could Brahmins visit the home, dine, and leave satisfied?
In essence, the presence of Mercury here bestows auspicious influences regarding all these matters. In other words, if Mercury is in the eleventh house, there is a high probability of the individual enjoying these comforts in abundance.
Some hold the view that Mercury here brings great benefits from friends and ensures one has good friends. However, upon closer inspection, this does not seem entirely accurate. Since Mercury is placed in the sign of its enemy, Mars, there is a possibility of some shortcomings in interpersonal relationships. It is not guaranteed that the person will be universally liked or popular.
Nevertheless, I do acknowledge that having Mercury here can indeed lead to the individual finding good friends. However, according to Astrologer Katve, any connection between Mercury and Mars brings the individual into contact with people whose friendship carries the risk of wasting a significant amount of their valuable time.
Since Mercury is a planet strongly associated with social circles and company, its presence in the eleventh house creates the possibility of adversely affecting the native's social life in some way.
The ancient astrologer Shri Golap holds the view that Mercury here makes the individual brilliant, virtuous, learned, and an exemplary man. According to the Yavana school of thought, Mercury in this position makes the person wise and a favorite of the king (or those in authority).
In reality, this language belongs to an earlier era. Yet, when viewed in a modern context, the description seems largely accurate. Mercury placed here is beneficial for the field of knowledge; furthermore, for those with a Gemini Ascendant, its placement in Aries—a sign ruled by Mars—endows the native with the knack for expressing their views clearly and forcefully.
Consequently, such individuals converse with their elders in a manner that often earns them affection or respect.
Some authors have described Mercury in this position as one who speaks sweetly—possessing a pleasant tone. However, this view appears valid only to a limited extent. The reason is that for Gemini Ascendants, Mercury is situated in Aries, a sign ruled by Mars. While the native certainly articulates their thoughts effectively and truthfully, their speech does not necessarily carry a great deal of sweetness.
The influence of Mars—the significator of anger—inevitably comes into play. As a result, there is a possibility of sudden outbursts of anger while discussing a topic. If such an individual does not fully agree with a point, they may sometimes behave in a quarrelsome manner.
Overall, many authors have attributed auspicious results to Mercury in this position. However, the 1952 edition of the *Lal Kitab* defines Mercury in this position by stating that the individual will be wealthy from birth; yet, their decisions, actions, or efforts will not yield full results until they reach the age of thirty-four.
For this reason, prior to the age of thirty-four, this Mercury is described using terms like "ullu ka pattha" (a fool or blockhead). However, after thirty-four, this very Mercury transforms into a "diamond" for the individual; meaning, it begins to exert a highly auspicious influence on their success and decisions from that age onwards.
If Mercury in the eleventh house turns malefic, the individual may suffer from back pain; in such a case, the influence of Mercury is considered inauspicious.
The *Lal Kitab* notes that while this Mercury yields highly auspicious results after the age of thirty-four, if the individual wears an amulet (*taweez*) obtained from a *sadhu* (ascetic), *fakir* (mendicant), or *Brahmin* at any stage of their life, the beneficial effects of Mercury will be completely destroyed. Wearing or keeping such an amulet renders Mercury extremely weak, potentially causing damage akin to uprooting it entirely.
In essence, doing so severely diminishes Mercury's positive influence, and the individual's own decisions could become the cause of their ruin.
If Mercury becomes weak in this position, seeking the aid of the Sun is advisable. By "seeking the Sun's aid," I mean that wearing a copper coin or a small piece of copper around the neck can mitigate Mercury's adverse effects. This is because the Sun is a friend to Mercury, and wearing the Sun's metal is believed to empower Mercury.
The *Lal Kitab* elaborates further on the inauspicious consequences of wearing an amulet when Mercury is in the eleventh house, stating that if an individual's birth...
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