Hindi:
मिथुन लग्न वालों के लिए छठे घर में मंगल की वृश्चिक राशि पडती है। इसी कारण से जीवन में कई बार शत्रु पैदा होने की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है। लेकिन वे आवश्यक नहीं है कि ऐसा व्यक्ति शत्रुओं द्वारा अपने जीवन में पराजित ही हो। ऐसे व्यक्ति के दुश्मन सिर्फ पीठ पीछे उसकी चगलियाँ करते हैं या उसके बारे में बुरा सोच सकते हैं या उसे किसी-न-किसी तरह बदनाम करने की कोशिश भी कर सकते हैं। लेकिन सीधे तौर पर ऐसे शत्रु, व्यक्ति का कोई विशेष नुकसान नहीं कर सकते। मेरे अपने अनुभव के अनुसार जब बुध इस घर में मंगल से किसी तरह दूषित हो तो ऐसे दुश्मन, देवे वाले के बीते काल के दोस्त रह चुके होते हैं और उस दोस्ती के वक्त उन्होंने टेवे वाले के साथ मिलकर कई गलत बातें या कई किस्म की शरारतें-खुराफातें की होती हैं। ऐसे दुश्मन उस व्यक्ति की अट्ठाईस से लेकर तैंतीस साल की आयु तक उसके पुराने भेद खोलकर उसे बदनाम करने की कोशिश करते हैं। इसका कारण यह है कि बुध एक संगति देव ग्रह है। सर्वश्रेष्ठ अंकशास्त्री के अनुसIर, जब वह मंगल से सीधा संपर्क जोड़ लेता है तो उस व्यक्ति के जीवन में किसी-न-किसी आयु पर उसकी संगति खराब हो जाती है जिसके कारण उसका कुछ समय भी बेकार की बातों में लग जाता है। मंगल से अशुभ होने के कारण बुध की जवानी की उम्र में संग-साथ बुरा असर डालता है और इस खराबी का धब्बा आगे जाकर उसकी आयु अट्ठाईस से तैंतीस साल के बीच में अपना प्रभाव डालता है। यहाँ बैठा हुआ बुध अपनी सातवीं दृष्टि से द्वादश भाव को देखने के कारण उस व्यक्ति के पैसे में बहुत ज्यादा बरकत नहीं रहती। इसका कारण ये है कि द्वादश भाव में शुक्र की वृष राशि आती है जिसके कारण उसके मन में पैसा खर्च करने की इच्छा बहुत प्रबल रहती है तथा कई बार उसका खर्च बेकार की चीजों में हो जाता है। लेकिन, यदि कुंडली में शुक्र की स्थिति ठीक हो तो ऐसे व्यक्ति को किसी-न-किसी रूप में विदेशों से लाभ होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। आचार्य वराहमिहिर कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति के शत्रु नहीं होते। वास्तव में यह मत कुछ ठीक प्रतीत नहीं होता। शायद इसका मतलब यह हो कि उसके शत्रु होते तो हैं, किंतुवह उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। यदि हम इस दृष्टि से देखें तो आचार्य वराहमिहिर का यह मत भी कुछ हद तक ठीक प्रतीत होता है। यदि हम ध्यान से देखें तो इस घर में बैठे हुए बुध के शत्रु उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। वास्तव में इसका कारण यह है कि काल-पुरुष कुंडली के अनुसार छठे घर में बुध की ही राशि आती है और बुध ही वाणों का कारक है। इसलिए जुबान का कारक बुध कभी बुरा नहीं बोलता बल्कि, अपनी मोठी जुबान से दूसरे लोगों की नजरों में उसका प्रभाव अच्छा पड़ता है और वह बहुत हद तक दूसरे लोगों को अपने वश में कर लेता है। छोटे-मोटे कुसूर होते हुए भी दूसरे लोगों के भ्रमों को भी दूर कर देता है। ऐसे बुध में दूसरों को प्रभावित करने की शक्ति होती है, लेकिन जातक खुद कभी नेता बनकर लोगों के सामने नहीं आता। हमारे एक प्राचीन ग्रंथ 'गर्ग संहिता' में वर्णन आया है, कि यदि यहाँ बैठा हुआ बुध नीच अथवा अच्छी हालत में न हो तो वह व्यक्ति संन्यासी हो जाता है। वास्तव में, यहाँ पर संन्यासी होने के लिए बुध का अशुभ होना जरूरी नहीं है, अगर हम इसको ठीक ढंग से समझें। हमारे एक और प्राचीन ग्रंथ चमत्कार चिंतामणि में जिक्र आता है कि इस घर का बुध संन्यासियों को ज्ञान देता है। दूसरे शब्दों में यहाँ बैठे हुए बुध की बुद्धि में एक विशेष प्रकार की शक्ति होती है, किंतु जरूरी नहीं है कि वह उस शक्ति का दुरुपयोग ही करे। उस व्यक्ति के ज्ञान में विशेष प्रकार की गहराई होना कहीं-न-कहीं जरूर नजर आता है। कुछ कुंडलियों में देखने में आया है कि यदि बुध यहाँ पर अच्छो हालत में न हो तो उस व्यक्ति की वाणी में भी किसी प्रकार का दोष पैदा हो जाता है। छठे घर का बुध होने के वक्त अगर दूसरे घर में अशुभ मंगल हो और बृहस्पति भी कुंडली में यदि बहुत अच्छा न हो तो उस व्यक्ति की जुबान में तुतलाहट और कई हालातों में गूंगापन होने की संभावना भी रहती है। इसका कारण यह है कि वाणी के घर में बैठा अशुभ मंगल लाल किताब के अनुसार अपने ही घर में बैठे बुध को अपनी पच्चीस प्रतिशत क्रूर दृष्टि से देखता है और ये दृष्टि बुध के लिए शुभ असर नहीं करती। वाणी का कारक बृहस्पति भी उस हालत में यदि अच्छे स्थान पर न हो तो बुध की सहायता नहीं कर सकता। लाल किताब में जिक्र आता है, कि ऐसे दोष को दूर करने के लिए यदि वह व्यक्ति अपने घर में मैना पाले तो बुध का अशुभ असर बहुत हद तक दूर हो सकता है। काल-पुरुष कुंडली के अनुसार छठे घर में कन्या राशि आती है जो अपने आप में व्यापार की कारक है और बुध स्वयं व्यापार का कारक है। इसीलिए बुध यदि यहाँ अच्छी हालत में बैठा हो तो वह व्यक्ति एक अच्छा व्यापारी बन सकता है। वह अपना हर माल कई गुना ज्यादा कीमत पर बेच सकता है। इसका कारण ये है कि दिमागी तौर पर कामयाबी के कई रास्ते निकालने में वह माहिर होता है। ऐसा व्यक्ति यदि दलाली के काम में पड़ जाए तो उसे बहुत सफलता मिलती है। इसमें उसकी जुबान का बहुत योगदान होता है। लेकिन, यही बुध यदि बुरी तरह अशुभ असर बाला हो या उस पर बुरे महों की दृष्टि पड़ती हो, तब इस तरह के फल देखने में नजर नहीं आते। लाल किताब के अनुसार बुध विशेष तौर पर दिमागी कामों का कारक है था सोच-विचार से ही उसके लिए धन की बरकत होती है। इसीलिए यहाँ बेटा তুলা শুধ अपने जीवन में बरी तरह से असफल हो जाएगा यदि वह व्यक्ति अपने हाथों से सख् मेहनत का काम करने लगे। जैसे मकान आदि का काम या अपने हाथों से लकड़ी का काम या किसी कारखाने में मजदरों का काम करने लगे। वास्तव में वृद्धि का कारक पद किसी प्रकार की सख्त मेहनत के लिए पैदा नहीं हुआ। यह तो केवल अपनी जुबान और अपनी समझ से ही सफलता की सीढ़ियों चढ़ता जाता है। इस घर में बैठे हर बुष को चमत्कार चिंतामणि में योगी होने का जो फल कहा है में ये जरूरी नहीं है कि ऐसा व्यक्ति योगियों के कपडे ही पहन ले। असल बात ये है उसके बारे में लाल किताब में भी इसी तरह का मिलता-जुलता फल मिलता है। वास्तव कि उस व्यक्ति के अंतकरण में किसी-न-किसी तरह के योगी होने की भावना अवश्य होती है। इसीलिए यहाँ बैठे हुए बुध को छपा हुआ योगी कहना ज्यादा उत्तम होगा। वह अपने अंतकरण से सच्चा साधु हो सकता है। उसकी जुबान से निकले आशीष या बहुआ बहुत बार पूरी हो जाती है। ऐसे बुध वाले के लिए जरूरी है कि वह अपने रिश्तेदारों, दोस्तों या और मित्रों के बारे में क्रोध की अवस्था में आकर कोई बुरी बात न कहे। किसी को दी हुई बहुआ उसके अपने जीवन पर भी अशुभ असर डाल सकती है। शायद यही कारण है कि यहाँ बैठे बुध वालों के लिए रिश्वत, बेईमानी या धोखे से कमाया धन कोई बरकत नहीं देता बल्कि वह एक गुप्त रूप में उसकी अपनी ही जड़ों को खोखला करता जाता है। लाल किताब के अनुसार फूल बुध का कारक है। लेकिन लाल किताब के उसूलों के अनुसार हर ग्रह का कारकत्व हर घर में जाकर बदलता रहता है। उदाहरण के तौर पर यही बघ आठवें घर में जाकर मुर्दे पर चढ़ाया फूल बन जाता है, किंतु छठे घर में यह बुध एक ऐसा फूल है जो हमारी जिंदगी में एक मिठास भरी सुगंध पैदा करता है। इस घर में बैठे बुध वाले के लिए एक बहुत अच्छा उपाय लाल किताब में लिखा गया है। उसके अनुसार किसी भी विशेष काम को करते समय यदि वह अपने आसपास फूल रखे तो बहुत शुभ फल देगा। यही बुध यहाँ कन्या का कारक भी है इसीलिए किसी विशेष काम को करते वक्त किसी कन्या का आशीर्वाद लेना भी उस काम की सफलता के लिए अच्छा ही फल कहा है। मेरे देखने में आया है कि मिथुन लग्न वालों के लिए यदि छठे घर में बुध के साथ मंगल और शुक्र दोनों ग्रह हों, तो ऐसा योग किसी-न-किसी रूप में व्यक्ति के खून को खराब करता है। जिसके कारण उसको चमड़ी की बीमारियाँ हो सकती हैं। लाल किताब में उसके बारे में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। जैसे मैने अभी जिक्र किया कि कन्या का आशीर्वाद लेना, शुभ बुध को और शुभ कर देता है। लेकिन, यदि और ग्रहों की दृष्टि के कारण यहाँ बैठा हुआ बुध अशुभ फल दे और उस कुंडली में शुक्र भी अच्छी हालत में न हो तो मिट्टी का बर्तन दूध से भरकर बाहर किसी वीरान जगह में दबा देना बुध के बुरे फल को दूर करेगा। इस उपाय का तर्क यह है कि मिट्टी का बर्तन बुध की वस्तु है और दूध चंद्रमा की वस्तु। यहाँ बुध को चंद्रमा के शुभहाथों में देकर जमीन यानी शुक्र के हवाले करना, बुध और शुक्र दोनों का फल शुभ कर देगा। ये उपाय अगर औलाद की पैदाइश में देरी हो रही है तो उसके लिए भी काफी शुभ फल देता है और पत्नी की सेहत के लिए भी काफी उपयोगी है। इस घर में बुध के साथ बृहस्पति का होना आदमी में किसी-न-किसी रूप में आध्यात्मिक विश्वास पैदा करता है। बहुत बार ऐसे आदमी पूजा-पाठी भी होते हैं। लेकिन, यदि बारहवें घर से इन पर राहु की दृष्टि पड़ती हो तो उस व्यक्ति के पिता या ससुर को साँस की या दिल की बीमारी होने की संभावना भी रहती है। यहाँ पर बुध के साथ सूर्य का होना व्यक्ति की विद्या की शक्ति को मजबूत करता है। यदि वह लेखक हो तो उसकी लेखन शक्ति में विशेष प्रकार का शुभ प्रमाण पैदा होगा। इस घर में यदि बुध के साथ चंद्रमा हो तो ऐसे व्यक्ति को कपड़े के काम से विशेष लाभ हो सकता है। लेकिन, यदि मंगल चौथे या आठवें घर में हो तो माता की आयु के लिए इसका कोई अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता। यहाँ पर बुध के साथ शुक्र हो तो ये अपने लिए राजयोग होगा। उस व्यक्ति की लड़कियों के लिए इसका बहुत शुभ असर होगा और गृहस्थ सुख भी अच्छा रहता है। यहाँ पर बुध के साथ मंगल का होना कोई विशेष शुभ फल नहीं देता। कुछ हालातों में ऐसे व्यक्ति के जीवन के किसी हिस्से में बुरी संगति से उस पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है। छठे घर में बुध और शनि दोनों बैठे हुए अच्छा फल ही देते हैं। ऐसे व्यक्ति के लिए जायदाद का फल अच्छा रहता है। बुध और राहु दोनों का इस घर में होना व्यक्ति को बहुत-सी मुश्किलों या अड़चनों से बचाता है। यहाँ पर बुध के साथ केतु का होना व्यक्ति के लड़के पर थोड़ा-सा बुरा असर डालता है, औरं दोनों का फल बहुत अच्छा नहीं रहता।
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English:
For Gemini ascendants, Mars is positioned in the sixth house in Scorpio. This placement increases the likelihood of encountering enemies in life, though it does not necessarily mean that these enemies can directly defeat or harm the person. Such adversaries often operate behind the scenes, spreading gossip, harboring ill thoughts, or attempting to tarnish the individual’s reputation. Based on my experience, when Mercury in this house is afflicted by Mars, these enemies are often former friends who, in the past, collaborated in mischief or wrongdoing. They may try to exploit old secrets between the ages of 28 and 33. Mercury, being the planet of intellect and communication, when connected to Mars, can cause temporary disruptions in associations, leading to wasted efforts or minor difficulties in youth. The sixth house Mercury’s aspect on the twelfth house restricts wealth accumulation because Venus resides in Taurus there, intensifying the desire to spend money, often on unnecessary things. However, if Venus is well-placed, foreign gains are possible. According to Acharya Varahamihira, such a person technically has no enemies, meaning their enemies cannot truly harm them, which is partially accurate. Mercury here, as the lord of speech, can influence others positively despite minor mistakes, though the native rarely seeks leadership roles. Ancient texts like the Garga Samhita and Chamatkar Chintamani suggest that Mercury in this house grants wisdom and yogic tendencies, though the person may not necessarily become a monk; instead, this placement often manifests as deep intellect and spiritual insight. If Mercury is afflicted, along with malefic Mars or poorly placed Jupiter, speech defects such as stammering or muteness may occur. According to Best Numerologer, The sixth house is associated with Virgo, a sign of commerce, and Mercury governs trade. A well-placed Mercury enables business success, negotiation skills, and profitable ventures, especially through communication, while an afflicted Mercury restricts such gains. Remedies from the Lal Kitab include keeping auspicious flowers nearby, receiving blessings from a young girl (as Mercury represents Virgo), or performing specific rituals involving clay pots and milk to counter negative influences. Mercury combined with Jupiter enhances spirituality, often leading to devotion, while afflictions from Rahu may affect the health of father or father-in-law. Mercury with the Sun strengthens intellect and writing abilities, while Mercury with the Moon favors trade, particularly textiles. Mercury with Venus brings prosperity, happiness in marital life, and benefits regarding daughters. Mercury with Mars may create minor obstacles due to bad company, whereas Mercury with Saturn favors property gains. Mercury with Rahu protects from many difficulties, while Mercury with Ketu may slightly affect sons and yields less favorable results overall.
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