क्या है कालसर्प योग?
जब कुण्डली में सारे ग्रह राहु और केतु के अंशों के बीच में आ जाते हैं. तो कुण्डली को कालसर्प योग से ग्रसित माना जाता है। यदि एक भी ग्रह राहु और केतु के अंशों के बाहर रह जाता है, तो पूर्ण कालसर्प योग नहीं माना जाएगा। हालांकि सारे ग्रह केतू और राहु के अंशों के बीच में आ जाये, तो भी आंशिक कालसर्प योग माना जाएगा।
ज्योतिषचार्य भाग्यराज गुप्त जी द्वारा बताये गए कालसर्प योग के सामान्य प्रभाव:
- किसी भी शुभ और महत्वपूर्ण कार्य को करते समय परेशानियों का सामना करना।
- मानसिक तनाव।
- आत्मविश्वास में कमी।
- स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां।
- गरीबी और धन की कमी।
- व्यापार में घाटा और नौकरी में परेशानी।
- उत्तेजना और बेकार की चिंताएं।
- मित्रों और शुभचिंतकों से मनमुटाव।
- मित्रों और शुभचिंतकों की तरफ से विश्वासघात।
- मित्रों, शुभचिंतकों और रिश्तेदारों की ओर से किसी भी तरह का सहयोग न मिलना।
कालसर्प योग एक अशुभ योग है। कभी-कभी पहली नज़र में जातक की कुंडली में कालसर्प योग दिखाई देता है, परंतु सूक्ष्म दृष्टि से देखा जाए तो उसमें कालसर्प भंग योग होता है जो प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखाता। परंतु फिर भी समस्त कालसर्प योग से प्रभावित व्यक्तियों को पूजा-पाठ व घर में कालसर्प योग शांति यंत्र स्थापित करना चाहिए।
कालसर्प योग शांति के उपाय
- ताजी मूली का दान करें।
- रसोई में बैठकर ही भोजन करें।
- भाद्रपद में सोलह श्राद्ध श्रद्धापूर्वक करें।
- एक नारियल समुद्र में प्रवाहित करें।
- नागपंचमी पर नागों के स्वरूप चाँदी के नाग की पूजा करें। पितरों का आवाहन करें। पितरों की सद्गति प्राप्त हो, ऐसा इस नाग से प्रार्थना करें। फिर नदी या समुद्र में नाग समेत पूजा में प्रयुक्त समस्त सामग्री प्रवाहित कर दें।
- घर के प्रवेश द्वार की चौखट पर चाँदी का स्वास्तिक लगाएँ।
- अगर कालसर्प योग के कारण वैवाहिक जीवन में बाधा आती है, तो पत्नी से दुबारा विवाह करें।
- राहु हमेशा मंत्र से वशीभूत होता है, इसलिए उपासना को अधिक महत्व दें।
- रात को सोते समय जौ के दाने सिरहाने पर रख दें। पौ फटते ही उन्हें पक्षियों को खिला दें।
- वर्ष में एक-दो बार आयु से अधिक की संख्या में जिंदा मछलियाँ नदी में प्रवाहित कर दें।
- भगवान गणेश का नित्य पूजन करें तथा 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का नित्य जाप करें।
- प्रत्येक बुधवार को श्री गणेश जी की पूजा करें तथा बूँदी के लड्डूओं का भोग लगाएँ। गणेश चतुर्थी को गणपति का पूजन अवश्य करें।
- शनिवार को पीपल को स्पर्श करें तथा मीठा जल अर्पित करें।
- शयन कक्ष में मोर पंख लगाएँ।
- प्रतिदिन पक्षियों को बाजरा इत्यादि डालें।
- एक नारियल के गोले में छेद करके उसमें काले तिल, जौ, बूरा, देसी घी तथा मेवा आदि डालकर जहाँ चींटियाँ हों, वहाँ पर दबा दें। यह प्रयोग शनिवार को करें।
- एक मुट्ठी हरी मूँग राहु के मंत्र से अभिमंत्रित कर दान दें।
- चाँदी की सर्पाकृति की अंगूठी बुधवार को मध्यमा उँगली में मंत्र से अभिमंत्रित करवाकर धारण करें।
