Hindi:
एक पौराणिक कथा में जिक्र आता है कि 'सोमा' जाति का एक पक्षी आकाश में रहता है। वह आकाश में ही अंडा देता है। यह अंडा पृथ्वी पर आने से पहले ही आकाश में टूट जाता है और उसमें से 'सोमा' जाति के पक्षी का बच्चा अंडे से बाहर निकलकर वापिस आकाश में उड़ने लगता है। एशिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी के अनुसार इस जाति के पक्षी मृत्यु से पहले कभी भी पृथ्वी का स्पर्श नहीं करते-इसलिए यह पक्षी पृथ्वी-जगत् की यथार्थ स्थितियों-कठिनाइयों तथा खुशियों का स्पष्ट रूप में अनुभव नहीं करता। मेरे विचार में 'सोमा' नाम का पक्षी, मीन लग्न के व्यक्ति का प्रतीक है।यदि आप किसी मीन लग्न के व्यक्ति के थोड़ा नजदीक आ जाएं या उससे मित्रता के संबंध हो जाएं, तो आपको उसके बारे में जानने में बहुत मुश्किल नहीं होगी। मीन लग्न के व्यक्ति के बारे में आपके दिमाग में जो एक काल्पनिक तस्वीर बनेगी, वो ऐसी होगी कि एक व्यक्ति एक हरे रंग का चश्मा पहने हुए है, और वह अपनी हैसियत के मुताबिक, अपने जानने वालों की सहायता आर्थिक रूप से या किसी और रूप से बहुत खुले दिल से कर रहा है। यदि आप वास्तव में ही उसके मित्र हैं, तो आप कई बार उसको यह राय देने की कोशिश करेंगे कि-'जिन व्यक्तियों की तुम सहायता कर रहे हो, उनमें से कुछ लोग सहायता के बिल्कुल पात्र नहीं हैं। वे आपकी सहायता से लिया हुआ पैसा, अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने की बजाय, शराब और जुए में ही नष्ट कर देते हैं।' मीन लग्न का व्यक्ति आपकी यह बात सुनकर बहुत नाराज हो जाएगा। बेशक, वो अपनी नाराजगी को आपके सामने प्रकट न करे, किंतु उसके अंदर इसका इतना बड़ा प्रभाव हो सकता है कि शायद आगे के लिए आपके और उसके संबंधों में किसी प्रकार का फर्क आ जाए। इसका कारण यह नहीं है कि उसमें बहुत संवेदनशीलता है, जिसके कारण उसने आपकी छोटी-सी बात का बुरा मान लिया है। वास्तव में, यह उसकी आंखों पर हरे रंग की चढ़ी ऐनक का नतीजा है कि वह दुनिया में जिससे भी मिलता है, केवल उनमें अच्छे गुण ही देख पाता है। शायद यह ऐनक परमात्मा ने उसकी आंखों पर लगाकर ही उसे इस दुनिया में भेजा है। आपकी राय उनके अपने बने हुए विश्वास को तोड देगी और इस विश्वास के टूटने के कारण ही वह थोडा अपने बारे में उलझन में पड़ जाएगा कि मैं गलत कैसे हो सकता था? वास्तव में, बहुत हालतों में वह गलत होता ही है, किंतु उसको अपने आप में इस बात को मानने के लिए बहुत कठिनाई महसूस होती है। वह जब एक रेगिस्तान को भी देखता है तो उसकी आंखों पर चढ़ा हुआ चश्मा उसको यह आभास देता है कि रेगिस्तान भी शायद हरे रंग का ही है। शायद इसी कारण से वह आपकी राय से सहमत होने की बजाय, अपने विश्वास के अनुसार सोचेगा कि आप किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में गलत कह रहे हैं। इससे उसके अहम् को थोड़ी चोट लगती है कि मुझे जो ठीक रूप में हरा दिखाई देता है, दूसरा व्यक्ति उसे सूखा रेगिस्तान कहने की कोशिश क्यों कर रहा है? शायद यही कारण है कि बहुत से ज्योतिष ग्रंथों में मीन लग्न के बारे में कहा जाता है कि उनको आत्मविश्वास का पक्का होना या उनकी दूसरों की राय के बारे में सही ही होना-इन बातों में कमी आ जाती है। इसलिए उनका अपने आप पर ठीक ढंग से संयम रखना या उनके दृष्टिकोण में स्पष्टता या चीजों का साफ दिखाई देना-इस पक्ष में भी कुछ रूप में कमी आ जाती है। मेरे एक नजदीकी मित्र हैं। उनकी पत्नी का उनके जीवन में सहयोगी होने की बजाय उनके दुःखों के होने का कारण कहा जाए, तो ज्यादा सही है। वह जीवन में जितनी प्रगति कर सकते थे, उसमें कई बार उससे बहुत कम प्रगति करना और कई बार बहुत-सी उलझाने वाली स्थितियों से गुजरना, उनकी पत्नी के कारण ही हमेशा होता रहा है। जब वो उपस्थित नहीं होते तो हममें से कुछ मित्र, जो उनके दोस्त हैं, उनकी पत्नी और उनके स्वभाव तथा उनके दृष्टिकोण के बारे में, हमेशा मजाक से आपस में बातें करते हैं और इस मजाक से बातें करते-करते कई दफा हमारे मन में अफसोस भी पैदा होता है कि एक बहुत अच्छा व्यक्ति, जिसमें जीवन में काफी कुछ करने की क्षमता थी, वह केवल अपनी पत्नी के कारण ही जीवन में लगभग असफल ही रहा। जब उसकी पत्नी उसके पास भी न हो, तो वह अपने रिश्तेदारों और दूसरे व्यक्तियों से बात करते हुए हमेशा कहता है कि-'मेरी पत्नी तो साक्षात् देवी का रूप है। उसने मुझे जीवन में बहुत सहारा दिया है। आज मैं जो कुछ भी हूं वह अपनी पत्नी के कारण ही हूं।' यहां मेरे कहने से मतलब यह नहीं है कि उनकी पत्नी अच्छी नहीं होती। यह सिर्फ उनके दृष्टिकोण को समझाने के लिए मैंने उस मित्र का जिक्र किया है. जिसका अपनी पत्नी के बारे में इस तरह का दृष्टिकोण है। मीन लग्न के व्यक्ति में. जब वो किसी के नजदीक आता है तो उसकी बहुत इच्छा होती है कि वह नजदीक आया व्यक्ति उसकी खुले मन से पूरी तरह को प्रशंसा करे। ऐसा व्यक्ति उसका कोई मित्र हो सकता है, कोई रिश्तेदार या कोई अन्य परिचित भी हो सकता है। दूसरे शब्दों में, वह जिनको पसंद करता है या जिनको नजदीक आता है, उनको इतने ऊंचे स्थान पर बिठा देता है कि वे व्यक्ति मात्र व्यक्ति न रहकर पूजनीय व्यक्ति बन जाते हैं जबकि वास्तव में उन लोगों में पूजनीय होने के कोई लक्षण नहीं होते। इसलिए इस लग्न के व्यक्तियों को जीवन में बहुत बार अपने दृष्टिकोण के गलत होने के कारण दुःख भी प्राप्त होता है। मेरे एक और मित्र, अपने एक रिश्तेदार की मकान बनाने में काफी हद तक अपने आपको मुश्किल में डालकर भी सहायता करते रहे। लेकिन बाद में जब उन्हें किसी तरह का काम पड़ा, जो बहुत बड़ा नहीं था, तो उस रिश्तेदार ने ऐसे आंखें फेर लीं. जैसे इसको जानते ही नहीं। इस दुःख को उन्होंने गहरे रूप में लिया और उससे हमेशा के लिए संबंध खत्म कर लिये। अपने इस रिश्तेदार को समझने में उन्हें बहुत समय लगा जो और लग्नों के मुकाबले में जरूरत से बहुत ज्यादा था। मीन लग्न के स्वभाव की विचित्रता को हम एक और दृष्टिकोण से भी ज्यादा अच्छी तरह समझ सकते हैं। वास्तव में, मीन लग्न का व्यक्ति अपने दिमाग तथा चीजों के प्रति, हेतु से काम नहीं लेता; बल्कि उसके जीवन के बहुत से फैसले और बहुत से कार्य उनके भावनात्मक व्यक्तित्व से ही जन्म लेते हैं। शायद भावना प्रधान व्यक्ति होने के कारण वह अपने दृष्टिकोण को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं रख पाता। इसीलिए बहुत से ज्योतिष आचार्यों ने कहा है कि मीन लग्न के व्यक्तियों को अपने आपमें एक संयम पैदा करके जिंदगी को अपनी इच्छानुसार चलाने में कई प्रकार की कठिनाइयां होती हैं। कुछ ज्योतिष आचार्यों का मत है कि मीन लग्न का व्यक्ति अपने ही सपनों की बनाई हुई दुनिया में रहता है और उसका वास्तविकता या जीवन के यथार्थ से बहुत नजदीकी संबंध नहीं रह पाता। वह अपने रंग-बिरंगे सपनों की दुनिया में जब किसी सपने को टूटता हुआ देखता है तो कई बार उसको अपने सपने की मृत्यु बर्दास्त करना मुश्किल हो जाता है। बेशक, मीन लग्न का स्वामी बृहस्पति है किंतु आप फिर भी देखेंगे कि मीन लग्न के बहुत से व्यक्ति जब अपने सपने के टूटने के कारण बहुत दुःखी होते हैं, तो कई दफा वह नशीले पदार्थों का सहारा लेते हैं-जिसके कारण वो अपने दुःख को सह सकें या एक सपना टूट जाने पर नशे की हालत में कोई और सपना देख सकें, जिससे पहले सपने के दुःख का प्रभाव किसी मात्रा में कम हो सके। मीन लग्न का व्यक्ति कभी किसी को धोखा देने की कोशिश नहीं करता । हां, यह बात जरूर है कि वह अपने आप को ही काफी सीमा तक धोखा देता रहता है। कहा जाता है कि दुनिया में सबसे आसान बात अपने आपको धोखा देना है। इसमें आसानी इसलिए है कि एक व्यक्ति जो कल्पना करता है और यदि वह अपनी कल्पना को सच में समझ ले तो यह उसके लिए खुशी का कारण बन सकती है और उसके लिए किसी मेहनत की जरूरत भी नहीं पडती। इसलिए मीन लग्न का व्यक्ति अपनी कल्पना को ही सत्य मानकर, बहुत हद तक अपने आपको धोखा देता है। शायद यही कारण है कि वह अपने सही रूप को पहचानने में बहुत समय लेता है और कई बार जीवनभर वो अपने रूप को पहचान नहीं सकता। हमारे बहुत से ज्योतिष ग्रंथों में तथा लगभग सभी ज्योतिष आचायों ने मीन राशि की आकृति को दशति हुए कहा है कि इसका रूप ऐसा है. जैसे दो मछलियों का एक युग्म हो और इनमें से एक मछली दूसरे की पूंछ पर अपना मुख रखे हुए है और दोनों विपरीत दिशा की ओर तैरने का प्रयत्न कर रही हैं। शायद यह प्रतीक मीन लग्न के व्यक्ति के उस रूप को दर्शाता है, जिसमें वह अपने जीवन में एक पक्की धारणा न बनाकर विपरीत दिशाओं में जाने की कोशिश में लगा रहता है। कुछ और ग्रंथों के अनुसार मीन राशि का प्रतीक एक मछली है, जो वास्तव में विष्णु का अवतार है। शायद मीन राशि का यह प्रतीक, उसके दूसरों की सहायता करने की वृत्ति की ओर इशारा करता है। कुछ और ग्रंथों के अनुसार मछली एक मीनानाथ योगी का चिह्न है। इस मीनानाथ योगी ने शिवजी से योग की विशेष और गहरी शिक्षा प्राप्त की तथा बाद में इसी शिक्षा के कारण हमारे देश की नाथ परंपरा के साधु पैदा हुए। मेरे अपने अनुभव के अनुसार मीन लग्न के व्यक्तियों में दूसरे लग्न के मुकाबले में योग तथा साधना करने की काफी हद तक क्षमता होती है। यह और बात है कि अपनी इस क्षमता को पूर्णरूप से अपने जीवन में वह प्रयोग में ला सके या नहीं। एक प्राचीन ग्रंथ 'चतुर्वर्गा-चिंतामणि' के विश्वकर्मा शास्त्र के अध्याय में जिक्र आता है कि मीन राशि की आकृति एक काले रंग के आदमी की है, जिसका चेहरा मछली का है और उसका पेट बढ़ा हुआ है। उसने बहुत से हीरे-जवाहरात और जेवर पहने हुए हैं तथा वह दो मछलियों के ऊपर खड़ा है। उसके दोनों हाथों ने एक-एक मछली पकड़ी हुई है। मेरे विचार में मीन राशि की यह आकृति, काफी हद तक हमें मीन लग्न के व्यक्ति को जानने में सहायक होगी। उसका दो मछलियों पर खड़ा होना ही इस बात की ओर संकेत देता है कि उसके इरादे बहुत दृढ़ नहीं हो सकते क्योंकि मछली कोई सख्त पत्थर या जमीन नहीं है, जिसके ऊपर खड़ा हुआ व्यक्ति बार-बार फिसल न सके और दसरे उसके हाथों में पकड़ी हई मछलियां भी यही संकेत देती हैं कि अपने जीवन की कोई प्राप्ति किसी विशेष लक्ष्य को लेकर नहीं हो सकती-क्योंकि मछली का कुछ भरोसा नहीं कि कब वह हाथ से फिसल जाए और शायद कई बार, बार-बार पकडने पर फिसलती रहे। शायद इसी कारण से मीन लग्न के व्यक्ति अपने जीवन में कई कार्य करने की कोशिश करते हैं, किंतु उस कार्य की सफलता का इनाम उनके हाथों से फिसलता रहता है। इसीलिए उन्हें कई बार अपने व्यवसाय बदलने पड़ते हैं और व्यवसाय बदलने का दूसरा कारण यह भी है कि वह जिस कार्य में लगे हुए हैं, उस पर उनको पूर्णरूप से भरोसा नहीं रहता कि शायद यह कार्य उनके लिए सही है या नहीं। मीन लग्न की कुंडली में मीन राशि का स्वामी बृहस्पति है। यही बृहस्पति मीन लग्न वालों के लिए कर्म-स्थान में पड़ने वाली धनराशि का स्वामी भी हो जाता है-इसलिए मीन लग्न के व्यक्तियों पर बृहस्पति का प्रभाव और लग्नों के मुकाबले में सबसे ज्यादा होता है। बृहस्पति के प्रभाव के कारण मीन लग्न के व्यक्ति अपने अंदर छुपा हुआ एक विशेष प्रकार का संतोष रखते हैं और वह आर्थिक परिस्थितियों से बुरी तरह नहीं घबराते, उनके अंदर कहीं-न-कहीं यह भावना रहती है कि शायद परमात्मा हमारे बिगड़े हुए कामों को ठीक कर देगा। 'लाल किताब' के अनुसार बृहस्पति को एक 'ब्राह्मण या साधु' की संज्ञा दी गई है। शायद इसीलिए मीन लग्न के लोग, जब उनकी आम जरूरतें पूरी हो जाती हैं तो उनका लक्ष्य किसी और भी ऊंचे शोध पर पहुंचने का नहीं होता-क्योंकि एक साधु या ब्राह्मण केवल अपनी आवश्यकताओं के पूरा होने में ही भगवान की कृपा मानता है। यह जरूर है कि मीन लग्न के व्यक्तियों में संतोष की मात्रा काफी सीमा तक होती है; किंतु मीन लग्न का व्यक्ति जब अपने अंदर बहुत बड़ी महत्त्वाकांक्षा पैदा कर लेता है तो उसका उसमें सफल होना काफी हद तक असंभव होता है। (( ऐसा व्यक्ति यदि स्वयं को भाग्य के सहारे छोड़ दे, तो उसकी सफलता की सीमा बहुत बढ़ जाएगी। लेकिन यदि वो लालच में आकर चेतन मन से बहुत संघर्ष करता है या पैसा कमाने के लिए बहुत साधन अपनाने की कोशिश करता है और अपनी पूरी शक्ति लगाकर उसे सफल बनाने की कोशिश करता है तो ऐसी हालत में उसका सफल होना संभव नहीं हो पाता। बल्कि कुछ हालतों में मेरे देखने में आया है कि ऐसी कड़ी मेहनत के कारण उनकी आर्थिक दुर्दशा कई बार उनको बर्बादी की सीमा तक ले जाती है। इसका कारण यह है कि वह वृहस्पति के धार्मिक स्वभाव और एक साधु या ब्राह्मण स्वभाव को भूलकर जब एक व्यापारी या बनिये जैसा बन जाए तो बृहस्पति उनकी सहायता करना बंद कर देता है-जिसके कारण यह अपने शांतिपूर्वक चल रहे जीवन में अपने आप ही आग लगा सकते हैं। कन्या संतान ज्यादा होती है। शायद इसका कारण यह है कि मीन लग्न की कुंडली कुछ ग्रंथों में जिक्र आता है कि मीन लग्न के व्यक्ति के लड़कों की बजाय में चौथे घर में कर्क राशि पड़ती है, जिसका स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा स्त्री ग्रह होने के कारण ऐसे व्यक्ति को औलाद में लडकियों की संख्या ज्यादा करता है। इसके अलावा मीन लग्न की कुंडली में ग्यारहवें घर में शनि की राशि आती है और शनि भी कोई पुरुष ग्रह नहीं होता जो लडकों की पैदाइश का कारक बन सके। यह देखने में आता है कि ऐसे व्यक्ति की कन्याएं अपने जीवन में ज्यादा सुखी रहती हैं, किंतु यह बात उनके लडकों पर हमेशा लागू नहीं हो सकती। कुछ ज्योतिष आचार्यों का मत है कि मीन लग्न के व्यक्तियों का विवाहित जीवन सुखी नहीं होता। शायद इन आचार्यों के मत में कुछ सीमा तक सच्चाई भी हो, क्योंकि मीन लग्न की कुंडली में सप्तम स्थान यानी शादी के भाव में कन्या राशि पड़ती है, जिसका स्वामी बुध है और बुध, बृहस्पति का शत्रु है। इसलिए मीन लग्न के व्यक्तियों के लिए सातवें घर में पडने वाली राशि उनके विवाहित जीवन में किसी-न-किसी रूप में सुख या प्रेम की कमी लाती है। इसके अतिरिक्त शादी का कारक शुक्र है तथा मीन लग्न की कुंडली में शुक्र की तुला राशि अष्टम स्थान में पड़ती है और अष्टम में शुक्र की राशि होना शुभ नहीं रहती। शायद इसी कारण से इन व्यक्तियों के विवाहित जीवन में आपस में गहरा प्रेम या वैचारिक तालमेल अथवा उनके गृहस्थ का सुखी रहना-यह बहुत हद तक संभव नहीं हो पाता। कुछ ज्योतिष ग्रंथों में जिक्र आता है कि मीन लग्न के व्यक्ति में आंतरिक व्याकुलता रहती है। दूसरे शब्दों में, उन्हें स्वयं को समझ पाने में ही मुश्किल होती है। इसी कारण से उनका स्वयं का मालिक बनना मुश्किल होता है। मीन लग्न के व्यक्ति के अपने अंदर यह धारणा होती है कि वह अपने आपको तलाश कर रहा है; किंतु कभी-कभी उसे इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं रहता कि वह क्या तलाश कर रहा है। शायद यही उनकी मानसिक अस्पष्टता का कारण है। जैसा कि हम जानते हैं कि मीन राशि जल तत्त्व राशि है और सभी ज्योतिष पद्धतियों में इसका प्रतीक भी मछली को लिया गया है और जल का या मछली का दृढ़ होना संभव नहीं-इसलिए ऐसे व्यक्ति अपने दृष्टिकोण में दृढ़ता प्राप्त नहीं कर सकते और कई बार वो जिस प्रकार के वातावरण में रहते हैं, उसके प्रभाव को बहुत जल्दी ग्रहण कर लेते हैं। मीन लग्न के व्यक्तियों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे इस प्रकार के मित्र बनाएं या ऐसे वातावरण में रहें जो उनके लिए एक प्रकार की अच्छी शिक्षा का कारण बनें या वह दूसरों की अच्छी आदतों को पूर्णरूप से ग्रहण कर सकें। यदि उसका वातावरण अच्छा न हो तो वो उस बरे वातावरण को भी जल्दी अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है- जिसके कारण उसके जीवन की सफलता बहुत सीमा मीन लग्न के व्यक्तियों के रहने के वातावरण तथा उनके मित्र वर्ग के बारे में यह बात भी बहुत जरूरी है कि वह उनसे अच्छे तथा जीवन को समझने के लिए यथार्थ गुण प्राप्त करके, उनकी तरह जीना सीखें क्योंकि यदि यह गुण मीन लग्न के व्यक्ति के जीवन का हिस्सा न बन सकें और वो ऐसे लोगों के साथ रहें जो उसकी कमजोरियों की ओर इशारा करें तो वह इस बात को सहन नहीं करेंगे और उनके अंदर अपने बारे में आंतरिक भ्रम या व्याकुलता और भी बढ़ जाएगी। यही कारण है कि आमतौर पर मीन लग्न के व्यक्ति उन लोगों के बहुत नजदीक आ जाते हैं जो उनके अवगुणों की कभी बात नहीं करते बल्कि मीन लग्न के व्यक्ति की हर बात की प्रशंसा ही करते हैं। ऐसे मित्रों को वह बहुत सम्मान देते हैं और भावनात्मक तौर पर भी उनको अपने बहुत नजदीक समझते हैं। मीन लग्न में बृहस्पति के बहुत ज्यादा प्रभाव के कारण यह लोग अपने जीवन में विपरीत स्थितियों के होते हुए भी उनसे बहुत शांति के साथ जूझने की कोशिश करते हैं और स्वयं में किसी तरह की झुंझलाहट को पैदा नहीं होने देते। जीवन की हर स्थिति में वे अपनी ओर से कोई कोशिश नहीं करते जिसके कारण जीवन की धारा में कोई ऊंची या तूफानी लहरें उठें। यह अपने आप में बहुत अच्छी बात है। शायद यही कारण है कि कई बार ऐसे लोग अपना विवाहित जीवन सुखी न होते हुए भी अपनी ओर से जीवनसाथी के अवगुणों को गुण ही समझते हैं। और यदि जीवनसाथी के अवगुणों को थोड़ा-बहुत समझ भी पाएं, तो वह उसके बारे में चुप्पी-सी साधे रखते हैं। दूसरे शब्दों में, वे अपनी ओर से कोई भी ऐसा कार्य नहीं करते जिसके कारण वह दूसरों के लिए बेचैनी की वजह बन सकें। यह अपने आपमें एक अच्छा गुण है, किंतु इसी गुण के कारण उनको यह कीमत भी चुकानी पड़ती है कि वह अपना जीवन जिस ढंग से जी सकते थे, उस ढंग से जीने में कुछ कमी रह जाती है या अपने जीवन में वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। मीन लग्न के व्यक्तियों के लिए जल से उत्पन्न चीजों के काम बहुत शुभ रह सकते हैं। इसके अलावा बृहस्पति की और कारक चीजें जैसे, सोना आदि के काम भी इन व्यक्तियों के लिए अच्छी सफलता दे सकते हैं। बहुत से लोगों का विचार है कि मीन लग्न में ग्यारहवें घर में शनि की राशि के कारण से शायद जमीन-मकान यानी जायदाद के काम अच्छा फल देंगे; लेकिन मेरे अपने विचार नहीं देते। इसका कारण यह है कि मीन लग्न की कुंडली में ग्यारहवें घर में शनि में मीन लग्न के व्यक्तियों को जायदाद की खरीद-फरोख्त के काम अच्छा फल की मकर राशि आती है और शनि जायदाद का कारक है। इसलिए उनको जीवन में कई बार जायदाद संबंधी काम या जायदाद संबंधी समस्याओं से वास्ता तो पड़ता है, किंतु इनका फल अंत में अच्छा नहीं रह पाता। इसका कारण यह है कि बेशक ग्यारहवें घर में यानी आय स्थान में शनि की राशि पड़ती है, किंतु शनि की दूसरी कुंभ राशि व्यय स्थान में पड़ती है, जिसके कारण जायदाद संबंधी की हुई कोशिशों का फल ठीक नहीं रह पाता-बल्कि उनके जीवन में किसी-न-किसी प्रकार की खीझ का कारण जरूर बन सकता है।
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