सीताराम नाम की महिमा: एक आदिवासी भक्त की चमत्कारी कथा | The Power of the Name “SitaRam”: A Miraculous Story of a Tribal Devotee.
Hindi:
एक आदिवासी भक्त
श्री अवध के सिद्ध संत श्री पंचारसाचार्य जी महाराज श्रीरामहर्षणदास जी महाराज जी के एक शिष्य है बाबा श्री रविशंकर शुक्ल (श्री रामदास जी) जी । शाहनगर के पास कचौरी गांव मे उनकी थोड़ी खेती थी ।
उसने पूछा - महाराज ! मुझसे क्या गलती हो गयी? महाराज बोले की मै तुम्हारे लिए अच्छा सात्त्विक भोजन लाता हूं, फिर भी तुम मछली मारते हो, जीव हिंसा का पाप करने वाले को मै यहां नही रख सकता । उसने कहा - महाराज ! मै सत्य कहता हूं, अब कभी किसी जीव की हिंसा नही करूंगा । मुझे यही काम पर आने दीजिए । महाराज ने कहा ठीक है तुम्हे काम से नही निकलूंगा । फिर वह आदिवासी बोला - मेरे मन मे बड़ा दुख हो रहा है की मैने इतने पाप किए, आप मुझे इन पापो से मुक्त होने का मार्ग बताएं ?
महाराज बोले तुम केवल 'सीताराम सीताराम' कहा करो । महाराज ने उसको भगवान के नाम का महात्म्य और नाम के प्रभाव की कुछ कथाएं सुनाई । बड़ा सीधा भोला था, उसने विश्वास कर लिया की नाम नही छोडूंगा । अब वह सीताराम सीताराम बोलता रहता । कुछ काल के बाद तो उसका मुंह हर समय हिलता रहता । नींद मे भी नाम चलता रहता । उसके पास माला तो थी नही, महाराज को देख देख कर वह भी अपनी उंगली हिलाता रहता । एक दिन उसको स्वप्न मे एक संत का दर्शन हुए, उन्होंने कहा की तुम सीताराम जपना छोड़ दो, नही तो तुम्हे बड़ा कष्ट होगा ।
उस व्यक्ति ने महाराज के पास जाकर सब बात बताई । महाराज बोले - यदि तुम्हे कष्ट नही सहन करना तो नाम छोड़ दो । उसने कहा की मै सीताराम जपना नही छोड़ सकता, मैने छोड़ दिया तो मर जाऊंगा । महाराज उसकी नाम निष्ठा देख कर प्रसन्न हुए और बोले नाम को पकड़े रहो । अब दूसरे दिन से ही उसके पैरों मे बहुत जलन होती थी । इतनी जलन की जल मे पैर डालकर बैठे तो गरम हो जाये । कुछ दिन के बाद उसके पैरों के नीचे के दोनो तलवो का चमड़ा निकल आया । तुम्हारे जन्म जन्मांतर का जो प्रारब्ध था वह इस सीताराम नाम ने निकाल दिया । लो भगवान का प्रसाद पाओ, ऐसा बोलकर स्वप्न मे उसको एक लड्डू दिया । स्वप्न मे दिया हुआ लड्डू प्रातःकाल मे प्रत्यक्ष उसके हाथ मे था ।
जैसे ही उसने प्रसाद पाया, उसका संसार से मन हट गया । अब उसका कही भी मन नही लगता था, घर का कामकाज छूट गया, केवल एक जगह बैठ कर घंटो नाम करता रहता । एक दिन पेड़ के नीचे नाम जप रहा था तब उसका शरीर छूट गया । आस पास के लोग जमा हुए, सकी उंगली हिल रही थी । लोगो ने सोचा उंगली हिलना बंद हो तब इसका शरीर जलाएंगे । उधर वह पहुंचा यमलोक मे, दिव्य सिंहासन पर यमराज बैठे थे । वहां पर भी उसका नाम चल रहा था । यमराज ने कहा - यमदूतों ! तुम किसी दूसरे व्यक्ति को लेकर आ गए । इसकी मृत्यु तो अमुक तिथि पर होगी । यह भगवान के साकेत लोक जाएगा, यह यहां नही आएगा । इसको वापस छोड़ आओ ।
उस व्यक्ति ने पूछा - यह कौनसी जगह है? यमदूतों ने बताया की यह यमलोक है, यहां कर्मो का लेखा जोखा होता है और पापियों को नरक मे यातनाएं दी जाती है । उनसे यमराज से कहा - मुझे एकबार नरक का दर्शन करना है । यमराज ने कहा - भगवान के नाम का जप करने वाले को नरक नही दिखाया जा सकता परंतु तुम भगवान के भक्त हो तो तुम्हारी इच्छा मै पूरी करूंगा । उसको नरक का दृश्य दिखा कर वापस छोड़ दिया गया । वह जीवित होकर बैठा और जाकर महाराज जी को सारी बात बतायी । उसने यह भी कहा - नरक की यातनाएं इतनी भयंकर है की मै कांप गया । उसने यमराज के मुख से सुनी हुई उसकी मृत्यु की तिथि भी बतायी । बोला की उस तिथि पर मेरा शरीर छूट जाएगा और मुझे भगवान का लोक प्राप्त होगा । ठीक उसी तिथि पर उसका शरीर छुटा और वह भगवान के धाम को चला गया । 🙏
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