पंच केदार की स्थापना कैसे हुई? भगवान शिव ने स्वयं को कैसे प्रकट किया? | How Was Panch Kedar Established? How Did Lord Shiva Reveal Himself ?
Hindi:
यह कथा द्वापर युग के अंत और कलयुग के प्रारंभ की संधि की है, जब कुरुक्षेत्र का मैदान रक्त से लाल हो चुका था।
महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद पांडवों ने राजपाट तो संभाल लिया, लेकिन उनके अंतर्मन में शांति नहीं थी। अपने ही बंधु-बांधवों और गुरुओं के वध के कारण उन पर 'गोत्र-हत्या' और 'ब्रह्म-हत्या' का दोष था। भगवान श्री कृष्ण के परामर्श पर, पांडव महादेव से क्षमा याचना करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए निकल पड़े।
पांडव सर्वप्रथम काशी पहुँचे, लेकिन भगवान शिव पांडवों द्वारा किए गए विनाश से रुष्ट थे। वे उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे गुप्त रूप से हिमालय चले गए। पांडव भी हार मानने वाले नहीं थे; वे उन्हें खोजते हुए केदारखंड (वर्तमान उत्तराखंड) की ऊँचाइयों तक पहुँच गए।
भगवान शिव ने पांडवों को आते देख एक बैल (वृषभ) का रूप धारण कर लिया और गुप्तकाशी के पास चर रहे पशुओं के झुंड में शामिल हो गए।
पांडवों को आभास हो गया कि महादेव इसी झुंड में छिपे हैं। तब भीम ने एक युक्ति अपनाई:
भीम ने अपना शरीर अत्यंत विशाल किया और दो पर्वतों पर अपने पैर फैला दिए।
सारे पशु भीम के पैरों के नीचे से निकल गए, लेकिन महादेव (बैल रूपी) ने एक वीर पांडव के चरणों के नीचे से निकलना स्वीकार नहीं किया।
जैसे ही भीम ने बैल को पकड़ने का प्रयास किया, महादेव भूमि में समाने लगे।
तभी भीम ने फुर्ती दिखाते हुए बैल की कूबड़ (पीठ का भाग) को कसकर पकड़ लिया। पांडवों की इस अडिग श्रद्धा को देखकर महादेव का हृदय पिघल गया और वे अपने वास्तविक रूप में प्रकट होकर उन्हें पापमुक्त कर दिया।
जब महादेव बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके शरीर के अंग पाँच अलग-अलग स्थानों पर ज्योतिर्मय रूप में प्रकट हुए। इन पाँचों स्थानों को पांडवों ने मंदिरों के रूप में स्थापित किया
1.केदारनाथ - यहाँ बैल की पीठ के आकार की शिला पूजी जाती है।
2.तुंगनाथ - यह विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है।
3.रुद्रनाथ - यहाँ महादेव के 'नीलकंठ' मुख के दर्शन होते हैं।
4.मध्यमहेश्वर - यहाँ शिवजी के मध्य भाग की पूजा होती है।
5.कल्पेश्वर - यहाँ महादेव की जटाओं की पूजा होती है; यह वर्षभर खुला रहता है।
कहा जाता है कि जब शिव जी बैल रूप में धरती में समाए, तो उनका ऊपरी भाग (सिर) नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रकट हुआ, जिसे आज हम पशुपतिनाथ के नाम से जानते हैं। केदारनाथ और पशुपतिनाथ को एक ही स्वरूप का हिस्सा माना जाता है।
पांडवों द्वारा निर्मित ये मंदिर आज भी भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन के बाद अन्य चार केदारों की यात्रा करता है, उसके पितर तृप्त हो जाते हैं और उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है।
हर हर महादेव! 🙏
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