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१} मंगल चौथे भाव में:
यह स्थिति अक्सर ऊर्जा और जोश से जुड़ी होती है, लेकिन यह आवेग या आक्रामकता की प्रवृत्ति का भी संकेत दे सकती है। कुछ ज्योतिषी सुझाव दे सकते हैं कि इस ऊर्जा को सेवा और दान के कार्यों के माध्यम से सकारात्मक रूप से प्रवाहित किया जा सकता है।

२} बृहस्पति सातवें भाव में:
यह स्थिति आम तौर पर शुभ मानी जाती है, क्योंकि बृहस्पति को ज्ञान, प्रचुरता और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। यह मजबूत रिश्तों और साझेदारी का संकेत दे सकता है। कुछ ज्योतिषी सुझाव दे सकते हैं कि यह स्थिति धर्मार्थ प्रयासों में सहयोग के अवसर ला सकती है।

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