Hindi:
यदि काल-पुरुष कुंडली बनाई जाए, यानी पहले भाव में मेष राशि को रखकर हम कुंडली बनाएँ तो छठे घर में कन्या राशि कन्या राशि में नीच राशि का होता है। शायद यही कारण है कि बहुत से पुराने ज्योतिषियों के ग्रन्थों में यहाँ शुक्र होने से अशुभ फलों का ही वर्णन किया गया है। हमारे प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ 'सारावली' में कहा गया है कि छठे घर में शुक्र होने से स्त्री पक्ष से अनिष्ट फल मिलता है। यहाँ पर अनिष्ट की कोई व्यापक परिभाषा नहीं की गई। लेकिन एक दूसरे प्राचीन ज्योतिषी हरिवंश का विचार है कि यहाँ शुक्र होने से उस व्यक्ति को अच्छी स्त्री नहीं मिलती या स्त्री की कुंडली में अच्छा पति नहीं मिलता। कुछ हद तक हमें इन विचारों से सहमत होना पड़ेगा, किंतु जब हम वृष लग्न की बात करते हैं तो वृष लग्न वालों के लिए छठे घर में तुला राशि आती है जो शुक्र की अपनी ही राशि है। सर्वश्रेष्ठ अंकशास्त्री के अनुसIर इसलिए काल-पुरुष कुंडली के प्रभाव के कारण स्त्री के संबंध में किसी न किसी प्रकार की असंतुष्टता या चिंता तो रहती है, किंतु वृष लग्न से शुक्र के अपनी ही राशि में होने से कुल मिलाकर बहुत ज्यादा अनिष्टकारक फल प्राप्त नहीं होता। यहाँ पर यह जरूरी होगा कि लाल किताब के एक ब्यान का वर्णन किया जाए। लाल किताब के अनुसार यदि छठे घर में शुक्र हो तो ऐसे पुरुष को या ऐसी स्त्री को यह जरूरी होगा कि वह ऐसे व्यक्ति से शादी करवाए जो अकेला हो। यानी उसके बहन या भाई न हो। इसका कारण यह है कि स्त्री के लिए पति के भाइयों का कारक मंगल है, और इसी तरह पुरुष के सालों का ग्रह मंगल है। यहाँ अशुभ शुक्र होने से उसके साथ मंगल का प्रभाव भी हो, यानी भाई हो तो शुक्र का शुभ असर बहुत हद तक कम हो जाता है, यानी शुक्र, मंगल के अधीन हो जाता है, जिससे नैसर्गिक तौर पर शुक्र के जो शुभ फल हैं उनमें काफी हद तक कमी आ सकती है। वृष लग्न वालों के लिए भी शुक्र का फल बहुत शुभ नहीं रह जाता। हालाँकि, वृष लग्न में छठे घर में शुक्र अपनी ही राशि में बैठा होता है। छठे घर में शुक्र के बारे में बृहद् संहिता में कहा गया है कि, इस स्थान में रवि दस दोष उत्पन्न करता है किंतु शुक्र हजार दोष पैदा करता है। इन दोषों के बहुत से रूप हो सकते हैं। इसके बारे में हम एक व्यक्ति के जीवन की घटनाओं के कुछ उदाहरणों को लेते हैं-एक पुराने ज्योतिषी श्री जागेश्वर कहते हैं कि इस घर में शुक्र होने से व्यक्ति अपने जीवन में कोई बहुत अच्छा सम्मान प्राप्त नहीं करता। इस बात को समझने के लिए हमें ये जानना जरूरी है कि इस सम्मान में कौन-सी बड़ी बाधा आती है। इसी के बारे में वैद्यनाथ का मत है कि उस व्यक्ति की जीवन में कई बार निंदा होती है। ऐसे व्यक्ति के लिए अपने जीवन में अच्छा सम्मान न प्राप्त करने का एक कारण यह है कि वह अपनी युवावस्था में अपनी संगति को ठीक नहीं रखता। कई बार उसके मित्र ऐसे होते हैं, जिनके कारण उसका बहुत कीमती समय नष्ट हो जाता है। इससे विद्या पर भी असर हो सकता है या उसके काम-काज पर भी। कई बार उसकी संगति को लेकर भी लोग उसकी निंदा करते हैं। लेकिन, फलदीपिका में कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति युवतियों द्वारा दूषित होता है। एक अन्य ज्योतिषी गोपाल रत्नाकर का भी मत है कि ऐसा व्यक्ति पर-स्त्री गमन करता है। वास्तव में, उसकी बदनामी का कई बार ये कारण होता है कि लोगों को उसके चरित्र के बारे में कुछ संदेह होता है और कुछ हद तक यह संदेह सही भी हो सकता है। ऐसे व्यक्तियों के शत्रु उसके इन दोनों नुक्सों को लेकर उसकी निंदा करने में सफल हो जाते हैं। शुक्र ग्रह स्त्री का कारक है, इसलिए इस घर में शुक्र होने से जो बैर, विरोध पैदा होता है वह स्त्रियों की ओर से और स्त्रियों के कारण होता है। इसके अलावा यहाँ शुक्र जो शत्रु पैदा करेगा वह भी स्त्री स्वभाव के होंगे। ये शत्रु उस व्यक्ति के साथ बहुत ईर्ष्या रखते हैं और उसके बारे में दूसरे लोगों के पास झूठी-सच्ची बातों से उसे बदनाम करने की कोशिश करते हैं। यह भी देखने में आता है कि ऐसे शत्रु किसी हद तक अपनी कोशिशों में सफल भी हो सकते हैं। इस घर में बैठा हुआ शुक्र एक रखैल स्त्री का भी कारक है। यहाँ पर यदि शुक्र पर बहुत ही अशुभ ग्रह की दृष्टि हो तो वह व्यक्ति किसी और स्त्री के साथ एक रखैल जैसे ही संबंध पैदा कर लेता है। कुछ हालतों में, ऐसे व्यक्तियों के बाहरी संबंध कई सालों तक रह सकते हैं। शायद यही कारण है कि जो शत्रु उस इंसान की बदनामी करते हैं उनको उसके बाहरी संबंधों के बारे में कुछ न कुछ जानकारी जरूर होती है। ज्योतिष के एक प्राचीन ग्रंथ चमत्कार-चिंतामणि में जिक्र आता है कि इस घर का शुक्र मीठा बोलने वाले दुश्मन पैदा करता है। यह विचार बहुत हद तक ठीक लगता है। इसका कारण यह है कि छठा घर बुध का पक्का घर है, बुध एक स्त्री ग्रह होने के साथ चुस्ती और होशियारी का यह भी है, जिसकी जुबान में मिठास है। शुक्र जैसे ग्रह का छठे घर में होना स्वाभाविक ही ऐसे शत्रु पैदा करेगा, जिनकी बोली में शहद और बगल में छुपा हुआ खंजर हो। हमारी कुंडली का छठा घर हमारे व्यवसाय विशेषकर नौकरी से संबंध भी रखता है। वृष लग्न वालों के लिए अपनी ही राशि में बैठा हुआ शुक्र नौकरी के लिए कोई बहुत अशुभ फल नहीं देता किंतु यह बात जरूर है कि उस व्यक्ति की नौकरी आमतौर पर साधारण तरह की होती है। लेकिन, नौकरी प्राप्त करने में ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती। यहाँ शुक्र सिर्फ उस स्वतंत्र काम के लिए अच्छा फल देता है जिसमें अपना पैसा न लगा हो, यानी ऐसे इंसान तकनीकी सलाहकार भी हो सकते हैं। दलालों , आढ़तियों के लिए भी ऐसा शुक्र शुभ फल देता है। लेकिन, अगर कोई व्यक्ति अपना पैसा लगाकर कोई व्यापार करे तो उसमें सफलता की संभावना बहुत कम हो जाती है। उसमें कर्जदार हो जाने की संभावना भी बनी रहती है। लाल किताब में इस घर के बारे में एक अजीब किस्म का वर्णन किया गया है। कहा गया है कि, 'लल्लू करे कव्वलियाँ रब सिधियाँ पावे' इसका मतलब है कि बुद्धि का सहारा न लेकर वह व्यक्ति कोई ऊटपटांग काम करता है, किंतु ईश्वर फिर भी ऐसे कामों में उसकी सहायता करता है। इस घर में शुक्र वाला जब अपनी योग्यता, किसी हुनर से या अपनी शिक्षा से सीखे हुए धंधे से संबंधित काम करता-करता अचानक सब कुछ छोड़कर कोई राह जाता काम ले लेता है, तो ईश्वर उस काम को सही कर देता है यानी उसे ऐसे कामों से सफलता मिलती है। लाल किताब में जिक्र आता है कि जब छठे घर का शुक्र अपना बुरा फल देना शुरू करता है तो उसकी सबसे पहली निशानी यह होती है कि उसके दाएँ या बाएँ हाथ का अँगूठा बिना किसी चोट के ही दर्द करने लगता है। ऐसी हालत में एक साधारण उपाय है कि वह व्यक्ति अपनी पोशाक का विशेष ध्यान रखे, कभी मैला-कुचैला कपड़ा न पहने तथा इत्र आदि का प्रयोग भी करे। ज्योतिष के कुछ प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि इस घर का शुक्र बाँझ स्त्री या नपुंसक पुरुष है। शायद इसका कारण यह है कि नपुंसक ग्रह, बुध के घर का स्थायी रूप से आया हुआ, स्त्री ग्रह शुक्र और भी कमजोर हो जाता है। किसी पुरुष ग्रह के असर से उसका इस तरह वंचित रह जाना औलाद के संबंध में रुकावटें पैदा करता है, किंतु औलाद की पैदाइश में ऐसा शुक्र उस वक्त अशुभ असर दे सकता है जब व्यक्ति का चाल-चलन ठीक न हो। ऐसी हालत में लड़के की पैदाइश में देरी हो सकती है या कुछ हालतों में लड़के का जन्म ही नहीं होता। शुक्र के इस घर में होने से अगर कुंडली में बुध शुभ हो तो पहली औलाद लड़की होगी। लाल किताब में कहा गया है कि फिर उस लड़की की पैदाइश के सात से बारह साल के बीच लड़का पैदा होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी। यहाँ बैठा हुआ शुक्र यदि पत्नी की सेहत के बारे में, औलाद के बारे में या व्यक्ति के अपने सम्मान के बारे में अशुभ फल लगातार दे रहा हो तो लाल किताब के अनुसार उसके लिए यह जरूरी उपाय होगा कि उस व्यक्ति की पत्नी कभी भी नंगे पाँव जमीन पर न चले। इसका तर्क यह है कि इस घर का शुक्र पाताल का शुक्र है। छठे घर को पाताल कहा गया है, इसलिए जमीन की तह के नीचे पड़ा हुआ है, लेकिन जब उसकी कारक स्त्री के नंगे पाँव जमीन को छू लेंगे तो पाताल में पड़ा हुआ प्रभाव ऊपर जमीन पर आ जाएगा। यहाँ पर अशुभ शुक्र का, विशेषकर जब घर के अमन-चैन पर उसका बुरा प्रभाव पड़ रहा हो तो उसके लिए उपाय है कि वह व्यक्ति अपने गुप्तांग को इकतालीस दिन लगातार दूध से धोता रहे। यहाँ शुक्र के जलते-सुलगते प्रभाव में दूध जो चंद्रमा का कारक है उसका शांत प्रभाव उसमें मिल जाएगा और घर में अमन-शांति के लिए यह बहुत शुभ फल देगा। शुक्र के साथ बृहस्पति का होना कोई बहुत बुरा फल नहीं देता। ऐसी हालत में, जब औलाद की पैदाइश में कोई रुकावट आ रही हो या शुक्र का अशुभ फल नजर आए तो वह व्यक्ति अपनी औरत के बालों में सोने का क्लिप प्रयोग में लाए तो शुक्र का फल शुभ हो जाता है। यहाँ पर शुक्र के साथ सूर्य का होना पत्नी की सेहत को कमजोर करता है। बेशक उसे कोई बीमारी न हो, लेकिन अंदर से जिस्म खाली रेत की तरह हो जाता है। किंतु, उस व्यक्ति के दुश्मन उसका कोई नुकसान नहीं करते । यहाँ पर शुक्र के साथ चंद्र का होना भी उस व्यक्ति की अपनी सेहत के लिए अच्छा नहीं रहता। कुछ हालतों में क्लेश का कारण यह होता है कि उसकी पत्नी और उसकी माँ के आपसी संबंध बहुत अच्छे नहीं रहते। यानी सास और बहू का झगड़ा होने का डर बना रहता है इस घर में शुक्र के साथ मंगल का होना उस व्यक्ति की स्त्री के मासिक धर्म में कई बार विकार पैदा करता है या स्त्री के जननेंद्रीय संबंधी रोग पैदा होने की संभावना रहती है। शुक्र और बुध दोनों का इस स्थान में होना शुक्र के फल को किसी हद तक अच्छा कर देता है। इससे व्यक्ति की आमदनी के साधन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। छठे घर में शुक्र के साथ शनि का होना शुभ फल देता है, क्योंकि काल-पुरुष कुंडली के अनुसार यहाँ शनि के मित्र ग्रह बुध की कन्या राशि आती है और वृष लग्न से, शनि की उच्च राशि तुला आती है। इसलिए यहाँ पर शनि बहुत शक्तिशाली होने के कारण अपने मित्र ग्रह शुक्र की सहायता करने से अति शुभ फल देता है। शुक्र और राहु का इस घर में होना, शुक्र के फल पर कोई बहुत बुरा असर नहीं डालता। किंतु उसकी पत्नी को काल्पनिक बीमारियों का डर बना रहता है। इस घर में शुक्र के साथ केतु हो, तो यह अच्छा फल नहीं देता। कई बार पुत्र-प्राप्ति में यह रुकावट का कारण बन जाता है और पत्नी की सेहत को भी खराब करता है।
अपने वर्तमान को अच्छा और भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https:// अपने ग्रहों को संतुलित करने के लिए
English:
If a Kaal-Purush Kundli is created, i.e., we place Aries in the first house, then Virgo is in the sixth house, a debilitated sign within the Virgo sign. Perhaps this is why many ancient astrologers' texts describe the inauspicious effects of Venus in this house. Our ancient astrological text, "Saravali," states that Venus in the sixth house brings adverse results from women. No comprehensive definition of inauspiciousness is given here. However, another ancient astrologer, Harivansh, believes that Venus in this house prevents a person from finding a good wife or a woman from finding a good husband. To some extent, we have to agree with these views. However, when we consider Taurus ascendant, for Taurus ascendant individuals, Libra falls in the sixth house, which is Venus's own sign. Therefore, due to the influence of the Kaal-Purush Kundli, there is some kind of dissatisfaction or anxiety regarding women. However, overall, Venus being in its own sign in Taurus ascendant does not result in significant adverse effects. It is necessary to mention a statement from the Lal Kitab here. According to the Lal Kitab, if Venus is placed in the sixth house, it is necessary for a man or woman to marry someone who is single, meaning they do not have a sister or brother. This is because Mars is the significator of a woman's husband's brothers, and similarly, Mars is the significator of a man's years. If an inauspicious Venus is also influenced by Mars, meaning there are brothers, the auspicious effects of Venus are significantly diminished. Venus becomes subordinate to Mars, which can significantly reduce the naturally occurring auspicious results of Venus. For those with a Taurus ascendant, Venus is also not very auspicious. However, in a Taurus ascendant, Venus is placed in its own sign in the sixth house. Regarding Venus in the sixth house, the Brihad Samhita states that, in this position, the Sun creates ten defects, while Venus creates a thousand. These defects can take many forms. Let's consider some examples from a person's life. An ancient astrologer, Shri Jageshwar, says that Venus in this house prevents a person from achieving significant respect in life. To understand this, we need to understand the major obstacles that hinder this respect. Vaidyanatha argues that this person faces criticism many times in his life. One reason for such a person's inability to achieve respect in life is that he keeps poor company during his youth. Often, he has friends who waste precious time. This can affect his studies or his work. People often criticize him for his company. However, the Phaladeepika states that such a person is corrupted by young women. Another astrologer, Gopal Ratnakar, also believes that such a person is prone to adultery. In fact, the reason for their infamy is often that people have some doubts about their character, and to some extent, these doubts may be justified. According to Best Numerologer The enemies of such individuals are successful in slandering them by exploiting these two flaws. Venus represents women, so the hostility and opposition generated by Venus in this house is from and because of women. Furthermore, the enemies Venus creates here will also be feminine in nature. These enemies are very jealous of the person and try to defame them by spreading false or true stories about them to others. It is also observed that such enemies may be successful to some extent in their efforts. Venus placed in this house also signifies a mistress. If Venus is aspected by a very inauspicious planet here, the person may develop a mistress-like relationship with another woman. In some cases, such individuals' extramarital affairs can last for many years. Perhaps this is why enemies who defame a person often have some knowledge of their external relationships. An ancient astrological text, Chamatkar-Chintamani, mentions that Venus in this house creates sweet-talking enemies. This idea seems largely correct. This is because the sixth house is the permanent house of Mercury. Mercury, being a feminine planet, also represents agility and intelligence, with a sweet tongue. A planet like Venus in the sixth house naturally creates enemies whose words are sweet and whose side is hidden. The sixth house of our horoscope also relates to our profession, especially employment. For those with a Taurus ascendant, Venus in its own sign doesn't bring any particularly inauspicious results for employment, but it is true that the person's job is usually mediocre. However, obtaining a job doesn't require much effort. Venus here only gives good results for independent work that doesn't involve investing one's own money, meaning such individuals can also be technical consultants. Such Venus also brings auspicious results for brokers and commission agents. However, if a person invests his own money in business, the chances of success are greatly reduced. There is also a possibility of becoming indebted. The Lal Kitab has a strange description of this house. It says, "Lallu kare qawwaliyaan raab siddhiyan paave." This means that without relying on reason, the person does something absurd, but God does not bless them.
Click on this link to improve your present and brighten your future. https:// For Align your Planetary
