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जब आप किसी सभा के आरंभ होने से पहले और लोगों के इंतजार में बैठे होते हैं तो एक-एक करके लोग आते-जाते हैं। कोई आते ही दोनों हाथों से सभी को नमस्कार करता है और खाली स्थान देखकर बैठ जाता है। कोई व्यक्ति आकर सीधा किसी जानने वाले के पास जाएगा और बैठ जाएगा और कई व्यक्ति ऐसे आएंगे, जैसे वे भीड़ से डरे-डरे हों और कमरे या हाल के कोने में दीवार के साथ बैठ जाएंगे। लेकिन एक व्यक्ति ऐसा भी आएगा जो पहले बैठे लोगों को हाथ नहीं जोड़ेगा और जानबूझकर अपनी मुस्कुराहट भी जाहिर नहीं करेगा, किंतु आपके मन में एक तीव्र इच्छा होगी उसको ध्यान से देखने की। आपको कुछ इस तरह का अनुभव होगा जैसे कोई विशेष प्रकार का व्यक्ति कमरे में दाखिल हुआ है। इसका कारण यह नहीं कि उसके कपड़े कुछ अलग किस्म के होंगे या वह बहुत ही सुंदर है, लेकिन उसमें कोई विलक्षणता है जो सबका ध्यान उसकी तरफ़ चला गया। ऐसा व्यक्ति सीधा आएगा और वह जहां बैठना चाहता है, वहां एक नजर से उस स्थान को चुन लेगा और वहां ऐसे बैठ जाएगा जैसे औरों की नज़रों की उसको कोई परवाह नहीं। जब वह कमरे में दाखिल होगा तो बिल्कुल सीधा चलता हुआ आएगा, उसकी चाल में बहुत तेज़ी नहीं होगी, चेहरे पर मुस्कुराहट न होते हुए भी आपको लगेगा कि जैसे चेहरे में या उसके पूरे ही व्यक्तित्व में एक प्रकार का आकर्षण है। उस व्यक्ति को देखकर आप समझ जाइए कि वह व्यक्ति सिंह लग्न का है। सिंह लग्न के व्यक्ति के आकर्षण तथा उसके बारे में समझने के लिए हमें सिंह राशि के मालिक सूर्य के बारे में पूरी तरह से समझना जरूरी है। सूर्य-चंद्रमा को छोड़कर सभी ग्रहों की दो-दो राशियां होती हैं, किंतु सूर्य और चंद्रमा की केवल एक-एक राशि होती है। सूर्य सिंह राशि का मालिक है, इसलिए सिंह राशि में सूर्य के विशेष गुण आ जाते हैं। सूर्य के स्वभाव से पहले हम सूर्य के ऊपर के दिखावे को समझ लें तो हम सिंह लग्न के व्यक्ति के आकर्षण के बारे में शायद कुछ ज्यादा स्पष्ट जान सकें। हमारे एक प्राचीन ग्रंथ 'वृहद यवन संहिता' में कहा गया है कि सूय एक बहुत सुंदर आदमी है, जिसका नाक तीखा है, जिसका माथा तथा गाल अंदर को धंसे नहीं हैं। उसकी छाती और जांघे बहुत मजबूत नज़र आती है। उसके दोनों हाथों ने डंडियों सहित एक-एक फूल पकड़ा हुआ है। उसके सिर पर एक ताज और कानों में गोल बालियां हैं तथा गले में चमकता हुआ हार है। उसके होठों पर सदा जीवित रहने वाली एक मुस्कुराहट है और उसके सिर के पीछे हीरों से जड़ा हुआ एक चक्र है। शायद सूयं के बारे में वृहद संहिता का यह वर्णन स्पष्ट करता है कि सिंह लग्न का व्यक्ति, यदि उसका सूर्य बहुत ही अशुभ न हो तो, सचमुच ही बादशाह जैसी शान का मालिक होता है। उसके चलने में एक शाही किस्म की शान होती है और वह अपने वस्त्रों के बारे में भी विशेष ध्यान रखता है। शायद उसकी शारीरिक तथा कपड़ों की सजावट और उसका सूयं जैसा तेज दूसरे व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। मेरे एक मित्र बता रहे थे कि एक दिन उनका बेटा बहुत देर से घर और उसके आने से पहले वो सो चुके थे। जब उसने दरवाज़ा खटखटाया तो उन्होंने नींद में दरवाज़ा खोल दिया और फिर जाकर सो गए। जब सुबह उनकी आंख खुली और वे बिस्तर में लेटे हुए थे तो उनको टक... टक... एक अजीब की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने एकदम बत्ती जलाकर देखा तो उनका बेटा अपनी एक टांग से कछुए की तरह छलांग लगाता हुआ पेशाबघर की ओर जा रहा था। उन्होंने हैरान होकर पूछा, तो बेटे ने बताया- "कोई खास बात नहीं, रात में लौटते हुए एक गड्ढे में गिर गया और मेरी एक टांग में थोड़ी कुछ तकलीफ़-सी हो गई है।" जब उस व्यक्ति, मेरे मित्र ने, अपने बेटे को ध्यान से देखा तो उसकी टांग बहुत सूजी हुई थी और वह ज़मीन पर भी नहीं लग रही थी। वे इस बात से थोड़ा चिंतित थे। उनके बेटे का यह रवड्या उन्हें अच्छा नहीं लगा। जब उसको इतनी तकलीफ़ थी तो रात को ही चाहिए था कि वह हमें बताता, तो हम किसी दवाई वगैरह का प्रबंध करते या कुछ और नहीं तो रुई से ही सेक देते, क्योंकि बिना दवा-दारू के वह सारी रात दर्द से तड़पता रहा होगा और टांग भी इतनी सूज चुकी थी। बाद में जब एक्स-रे करवाया गया तो टांग में फ्रैक्चर भी निकला था। मैंने हंसते हुए कहा था कि आप जानते हैं-आपके बेटे का सिंह लग्न है। सिंह के बारे में आपको यह जानना भी जरूरी है कि सिंह कभी अपने जख्म किसी को नहीं दिखाता। चिड़ियाघर में भी जब शेर को कोई जख्म हो जाता है ता उसका उपचार करना बहुत मुश्किल होता है। इसका कारण यह है कि अपने शरीर के जख्म दूसरों को दिखाना या अपनी भावना के दुःख को किसी के सामने प्रकट करना या अपनी किसी मानसिक अवस्था के बारे में किसी के आगे राना, पहुंचान किस्मत पत घरों वास्तव में दूसरों से दया की भीख मांगने की तरह ही है। यही कारण है कि एक शेर किसी को अपना जख्म नहीं दिखाता। क्योंकि उसको अपना जख्म दूसरा को दिखाना अपने आप में एक कमजोरी महसूस होती है। देखने में आता है कि सिंह लग्न वाले लोगों को समझने के लिए हमें शेर के बारे में ज्ञान प्राप्त करना जरूरी है। सिंह लग्न वाला व्यक्ति कभी सीधे-सीधे अपने दुःख के बारे में दूसरों से बहुत ज्यादा बात नहीं करता। सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी के अनुसार वह अपने दुःख को अपने आप ही झेलता है। सिंह लग्न का बच्चा भी आमतौर पर अपनी किसी मुश्किल के बारे में मां-बाप के आगे, दूसरे बच्चों की तरह नहीं रोता। इसी तरह बड़ी अवस्था में आकर, सिंह लग्न के व्यक्ति अपनी आर्थिक-मानसिक या भावनात्मक समस्याओं के बारे में दूसरों से बहुत कम बात करते हैं। शायद यह उनके अभिमान का एक रूप है या उनका स्वःअभिमान है। सिंह लग्न में आकर्षण की बात को लेकर यदि शेर को ध्यान में रखें तो ज्यादा बारीकी से समझ सकते हैं। शेर जंगल का राजा है। हम किसी भी जंगल में जाएं तो बहुत तरह के दूसरे जानवरों को नजर अंदाज करते हैं, किंतु जब शेर नज़र आएगा तो हम उसे कभी भी नज़र अंदाज नहीं कर सकते। इसका मतलब यह नहीं है कि वह शेर की भयानकता है, जो हमारी नज़रों को शेर की तरफ़ खींचती है, बल्कि यह शेर में ही अपनी तरह का एक आकर्षण है जो हमारी नज़रों को अपनी तरफ़ खींचता है। हमारे बहुत से प्राचीन ग्रंथों में सूर्य को विश्वचक्षु यानी ब्रह्मांड की आंखें कहकर पुकारा गया है। इसीलिए सूर्य की सिंह राशि के लोगों में बाहरी चीज़ों को देखने की शक्ति है, जिससे हम इस दुनिया को रात के अंधेरे में जागकर देख पाते हैं। लेकिन सिंह लग्न वाले लोगों में अपने अंतःकरण या अपने भीतर के चरित्र को जानने की शक्ति में कुछ कमी रहती है। शायद यह बात ठीक ही है कि सिंह लग्न वालों में अंतर्ज्ञान की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती। इसी तरह उनके स्वप्न आदि भी बहुत ज्यादा संदेश देने वाले सिद्ध नहीं होते। सिंह लग्न के व्यक्ति बाहरी दुनिया से ज्यादा संबंध रखते हैं और वह अपने आप की अंदरूनी अचेतन मन की अवस्था के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं रख सकते। हां, यह बात जरूर है कि इन्हें धार्मिक या किसी भी विषय पर ग्रंथों में पढ़ने से ज्ञान प्राप्त करने में कोई मुश्किल नहीं पैदा होती। योगशास्त्र के कुछ गंभीर ग्रंथों में सूर्य को प्राण कहकर भी पुकारा गया है। इसलिए सिंह राशि में जो शक्ति है, वह प्राणशक्ति है और प्राण ही हमारे इस भौतिक शरीर को जीवित रखने का साधन है। इसलिए सिंह लग्न वालों का हमारे जीवन के भौतिक तथ्यों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान होता है और उनको में उतरने की इतनी इच्छा नहीं होता। शायद यह मी सिंह लग्न वालों का भातिकवादी होने का एक संकेत है कि वह अपने कपड़ा के बारे में, अपने शरीर के बारे में काफ़ी ध्यान रखते हैं और दुनियावी तार पर उनमें एक तरह का दिखावापन भी पैदा हो जाता है। इसीलिए उनकी यह इच्छा रहती है कि जहां भी रहें, वह आकर्षण के केन्द्र ही रहे। यह और बात है कि अपनी इस इच्छा को पूरा करना उनके लिए काई मुश्किल बात नहीं होती। देखने में आता है कि सिंह लग्न वाले अपने कुछ मित्रों के साथ अच्छा संबंध रखते हैं और मित्रता जल्दी भी बना लेते हैं। लेकिन वह उतनी जल्दी हो यदि उस मित्र की कोई बात अच्छी न लगे, तो बहुत आसानी से उससे अपने संबंध हमेशा के लिए तोड़ भी लेते हैं। सिंह लग्न के लोग अपने जीवन को बहुत ऊचे स्तर पर जीने के बहल इच्छुक होते हैं। उनके दिमाग़ में पैदा होने वाली सभी स्कीम, आम दूसरे लग्न वाले लोगों से हटकर भिन्न प्रकार की होती है। जब वे अपना घर बनाने में बारे में सोचेंगे, अपने रहन-सहन के बारे में सोचेंगे या अपने जीवन के किसी भी पक्ष के बारे में सोचेंगे, तो उनमें इच्छा होगी कि वह बहुत ऊच स्तर का हो। मैंने अभी सिंह लग्न वाले लोगों के भौतिकवादी होने की बात कही है। यहां एक चीज़ को स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि सिंह लग्न के लोग पैसा इकट्ठा करने या कंजूसी करने के अर्थ में भौतिकवादी लोगों की तरह नहीं होते। जैसे वृष लग्न में इस तरह की भावना ज्यादा पाई जाती है। सिंह लग्न के लोग अपने पैसे के बारे में इतना ध्यान नहीं करते। वे दूसरों की पैसे के रूप में या किसी भी रूप में सहायता या दूसरों की मदद करके अपने आप में बहुत सुख महसूस करते हैं और यह होना यथार्थ ही है, क्योंकि सिंह लग्न का स्वामी सूर्य पूरे विश्व को रोशनी बांटता है और वह वास्तव में पूरे विश्व को जीवन देने वाला होता है। इसलिए सिंह लग्न के लोग दूसरे लोगों की उन्नति में या उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने में कभी पीछे नहीं हटते और कई बार देखने में आया है कि सिंह लग्न के व्यक्तियों का खर्च उनकी आर्थिक स्थिति से ऊपर हो जाता है। वह पैसे की कभी परवाह नहीं करते कि कब, कहा, कैसे और कितना खर्च हुआ है कई बार जब सूर्य ज्यादा शक्तिशाली न हो, तो सिंह लग्न वाले अपने जीवन में पूरी सफलता प्राप्त करने में असफल रहते हैं। इसका विशेष कारण यह है कि उनके स्वाभिमान के कारण वह व्यक्ति दूसरों की राय पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और अपनी मनमर्जी करते हैं। मनमजी करना कोई बुरी बात नहीं, किंत सिंह लग्न के व्यक्ति कोई भी काम करने से पहले उसके दोनों पक्षों को पूरी तरह ध्यान से नहीं देखते आमतौर पर सिंह लग्न के लोगों को जल्दी गुस्सा नहीं आता लेकिन जब आता है तो एक शेर की दहाड़ जैसा होता है और तब वे गुस्से में क्या कर जाएं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। और आश्चर्यजनक बात यह भी है कि उन्हें अपनी इस ग़लती पर कभी पछतावा भी नहीं होता। इसलिए उनके लिए अपनी ग़लतियों से सीख पाना थोड़ा मुश्किल ही होता है क्योंकि हम अपने जीवन में ग़लतियों से बहुत सीख पाते हैं, जैसे एक प्रसिद्ध व्यक्ति का कथन है कि 'हमारे जीवन का तजुर्बा ही हमारी ग़लतियों का परिणाम है या हम अपनी ग़लतियों से ही जो सीख पाते हैं, उसी को हम अपने जीवन का तजुर्बा कहते हैं।' सिंह लग्न वालों का सूर्य यदि बहुत अच्छी स्थिति में न हो तो ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में कई प्रकार की गंभीर ग़लतियां करते हैं। कई बार ये ग़लतियां इस कारण से भी हो जाती हैं कि दूसरे लोग उनसे किसी विशेष कार्य की अपेक्षा रखते हैं और वे दूसरों की प्रशंसा प्राप्त करने के लिए ही कई बार ऐसे काम कर जाते हैं, जो उनके लिए बहुत घातक सिद्ध होते हैं। यदि सिंह लग्न के व्यक्ति इस बात को ठीक से समझ लें कि दूसरों की प्रशंसा केवल बेवकूफ़ लोगों का ही भोजन बनती है, तो वह अपने जीवन में बहुत-सी मुश्किल स्थितियों से बच सकते हैं। किसी भी प्रकार की प्रशंसा को सच मान लेना, सिंह लग्न के बहुत से शुभ फलों को और उसके तेज़ को दाग लगा देता है या उसको बहुत कम कर देता है। आमतौर पर सिंह लग्न के व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में ऐसी स्थिति में रहते हैं, जहां पर कुछ लोग उनके अधीन काम करते हों। ऐसी स्थिति में वह लोग अपने काम को बहुत अच्छे ढंग से पूरा करते हैं। शायद इसका कारण यह है कि अपने अधीन व्यक्ति होने के कारण से, उनके मन में दूसरों से ऊंचा होने की इच्छा की पूर्ति होने के कारण, वह ज्यादा संतुष्ट होते हैं और संतुष्ट अवस्था में उनके किए हुए फैसले ज्यादा सफल होते हैं। देखने में आता है कि अपने निजी मित्रों के गुट में भी वह एक प्रकार से लीडर ही समझे जाते हैं और लोग उनकी राय लेते हैं। यह और बात है कि कई बार यह राय बहुत ही उचित हो या न हो, किंतु दूसरे लोग उनकी बात आसानी से मान लेते हैं।
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