Hindi:
मिथुन लग्न के लिए पाँचवें घर में शुक्र की तुला राशि पडती है। इसलिए यहाँ पर बैठा हुआ बुध व्यक्ति को श्रेष्ठ फल देता है। इसका शुभ फल बुद्धि और विद्या पर पड़ता है। पाँचवा घर संतान का घर होने के कारण संतान के लिए भी इसका फल शुभ होता है। लेकिन यहाँ पर यदि इस बुध पर केवल शनि की दृष्टि हो तो उस व्यक्ति के लिए पुत्र संतान की कमी होने की संभावना जरूर रहती है। यहाँ पर बैठा हुआ बुध अपनी सातवीं दृष्टि से एकादश भाव को देखता है: इसलिए बुद्धि-बल से प्राप्त लाभ अधिक होता है। ऐसा व्यक्ति शांतिप्रिय और स्वभाव का अच्छा होता है। मिथुन लग्न वालों के लिए पंचम भाव में तुला राशि आती है और तुला राशि के स्वामी शुक्र का भी ज्ञान से बहुत संबंध है। लाल किताब के अनुसार पाँचवाँ घर बृहस्पति ग्रह का पक्का घर है। पाँचवाँ घर हमारा विद्या, बुद्धि और ज्ञान का भी कारक है, इसीलिए यहाँ बुध होने से व्यक्ति विद्वानों द्वारा प्रशंसा प्राप्त करता है और उसकी दी हुई सलाह दूसरे लोगों का मार्ग-दर्शन करने के लिए भी बहुत अच्छा फल देती है। सर्वश्रेष्ठ अंकशास्त्री के अनुसIर, शुक्र की राशि में होने के कारण व्यक्ति को सुंदर वस्त्र आदि पहनने का विशेष शौक होता है तथा उसके घर में भी एक विशेष प्रकार की सजावट तथा शुद्धता रहती है। बहुत से लोगों का विचार है कि यहाँ बुध होने से व्यक्ति के जीवन में दूसरी स्त्रियों से या दूसरे लोगों के साथ कोई लंबे समय तक प्रणय संबंध कायम नहीं रह सकते। इस घर में बैठा हुआ बुध व्यक्ति को विद्या तथा दूसरी प्रकार की विद्याओं का अभ्यास या उनमें रुचि रखने का शौक विशेषतौर पर पैदा करता है। लेकिन, कई बार यह शौक थोड़ा-सा असाधारण भी हो सकता है। कुछ हालातों में, व्यक्ति में पराशक्तियों के बारे में जरूरत से ज्यादा विश्वास या कई बार वहम भी पैदा करता है। एक प्राचीन ज्योतिषी श्री कल्याण वर्मा ने अपने 'सारावली' नामक ग्रंथ में वर्णन किया है कि इस घर में बैठा हुआ बुध मंत्र-विद्या और तंत्र की दूसरी विद्याओं के बारे में विशेष शौक पैदा करता है। इससे यह जरूरी नहीं है कि वह व्यक्ति बहुत बड़ा तांत्रिक जरूर ही बन सके, लेकिन मंत्र-तंत्र तथा यंत्र आदि शक्तियों के बारे में ऐसे व्यक्ति में बहुत बड़ा विश्वास तथा शौक रहता है। इसी विचार को प्रकट करते हुए जातक चंद्रिका के लेखक ज्योतिषी जयदेव का मत है कि यदि यहाँ बुध हो तो व्यक्ति मंत्रशास्त्र में विशेष तौर पर रुचि लेता है। लेकिन, कुछ हालातों में यदि यहाँ बैठे हुए बुध पर मेरे विचार से राहु तथा शनि दोनों की दृष्टि पड़ती हो तो उस व्यक्ति में भूत-प्रेत आदि के बारे में भी विश्वास रहता है या कहीं-न-कहीं उसके मन में यह विचार उठता है कि शायद इस प्रकार की शक्तियाँ भी वश में की जा सकती हैं या इस प्रकार की शक्तियाँ हर व्यक्ति के जीवन में अपना प्रभाव डालती हैं। आचार्य वराहमिहिर का मत है कि इस घर में बैठा हुआ बुध व्यक्ति को मंत्री बनाता है और साथ में यह भी कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति दूसरों को सलाह देता है। वास्तव में वह व्यक्ति मंत्री ही बने, यह जरूरी नहीं है। क्योंकि, पहले समय में राजा के मंत्री का कर्तव्य ही राजा को किसी भी समस्या के बारे में अच्छी प्रकार की राय देना हुआ करता था। इसलिए यहाँ बुध के फल को दूसरों को अच्छी राय या अच्छी सलाह देना मानें तो मेरे विचार में यह वर्णन ज्यादा उपयुक्त होगा। इसी संदर्भ में यह सोचना भी जरूरी है कि, जैसे आचार्य वराहमिहिर ने मंत्री होना कहा है, उसी प्रकार से हमारे एक दूसरे प्रसिद्ध ज्योतिषी गुणाकर ने अपने 'होरामकरन्द' नामक ग्रंथ में भी इसी विचार को प्रकट किया है। वास्तव में, इसका कारण यह हो सकता है कि कालपुरुष कुंडली के अनुसार पाँचवें घर में सूर्य की राशि पड़ती है। इस कारण से जब बुध, सूर्य के घर में है तो सूर्य यानी राजदरबार तथा सरकार का कारक यहाँ अच्छा फल देता है। इसीलिए शायद यहाँ बुध के होने को मंत्री कहा गया है। लेकिन, यदि हम आज के संदर्भ में देखें तो अर्थ केवल इतना ही निकाला जा सकता है कि बुध होने के कारण व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिलने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है और वह इस क्षेत्र में प्रगति भी करता है। इसी विचार से मिलता-जुलता वर्णन एक और ज्योतिषी गोपाल रत्नाकर ने किया है। उनका मत है कि यदि बुध इस घर में बैठा है तो उस व्यक्ति को राजदरबार में सम्मान मिलता है। इसके दोनों अर्थ हो सकते हैं। पहला ये कि वह सरकारी नौकरी के लिए अच्छा फल देता है और दूसरा यह भी हो सकता है कि ऐसे व्यक्ति को किसी-न-किसी रूप में सरकारी तौर पर सम्मान मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बहुत से ज्योतिषियों के मन में ये धारणा काफी पक्की है कि इस घर में बुध होने से व्यक्ति की कन्याएँ बहुत होती हैं या उसको औलाद कन्या की ही प्राप्ति होती है। मिथुन लग्न में पाँचवें घर में बैठा हुआ बुध स्त्री ग्रह शुक्र की राशि में आने से शायद ऐसे लोगों के मन में ये विचार पैदा हुआ है। लेकिन, यदि हम एक और दृष्टिकोण से देखें तो काल-पुरुष कुंडली के अनुसार पाँचवें घर में सूर्य की सिंह राशि पड़ती है और यहाँ सूर्य की राशि होने के कारण ये जरूरी नहीं है कि उस व्यक्ति को पुत्र की प्राप्ति न हो। औलाद के बारे में मेरा अपना विचार है कि सबसे ठीक तरह का वर्णन श्री नारायण भट्ट ने चमत्कार चिंतामणि में दिया है। उनका विचार है कि उस व्यक्ति के कन्याएँ तो होती हैं, किंतु पुत्र की प्राप्ति में बाधा हो ही यह जरूरी नहीं है। हाँ, ये जरूर है कि पूर्व आयु में पुत्र की प्राप्ति होने में देरी जरूर हो सकती है। इसी संदर्भ में, हमारे एक प्राचीन ग्रंथ गर्ग संहिता में कहा गया है कि पंचम भाव में बध के फलस्वरूप संतान प्राप्ति में कोई बाधा नहीं होती। लेकिन यहाँ पर बुधवा अच्छी स्थिति में होना आवश्यक है। यदि यहाँ बुध असंगत हो या उस पर शत्रु पहीं की दृष्टि पडती हो तो संतान की मृत्यु होने या संतान की ओर से व्यक्ति को कष्ट होना कहा गया है। यदि यहाँ संतान से ये फल हम विशेष तौर से पुत्र संतान पर लागू करें तो कुछ हालातों में ऐसा होना संभव होता है। इसी तरह यहाँ बैठे हुए बुध पर मंगल या केतु का प्रभाव भी उस व्यक्ति के मामा के परिवार में किसी-न-किसी प्रकार की गिरावट पैदा करता है। पत्रों के मकाबले में कन्याओं की संख्या ज्यादा होने की संभावना जरूर रहती है। यहाँ बृहस्पति के पक्के घर में बैठा हुआ बुध आदमी के जीवन में कोई बहुत बड़ी प्रकार की मश्किलें या कमियाँ पैदा नहीं करता। आर्य ग्रंथों के अनुसार ऐसा व्यक्ति स्त्री-पुत्रों से युक्त होता है। उसके जीवन में सुख की कमी नहीं होती और वह व्यक्ति पवित्र गुरु और ब्राह्मणों का भक्त होता है। शायद बुध की इस स्थान में आकर मन की शुद्धि तथा अच्छे व्यक्तियों पर विश्वास होने की संभावना सचमुच ही बहुत बढ़ जाती है। इसका कारण ये है कि यहाँ पर बृहस्पति के पक्के घर में होने के कारण से, बुध में बहुत हद तक बृहस्पति का प्रभाव शामिल हो जाता है, जिसके कारण उस व्यक्ति को आत्मा काफी हद तक शुद्ध होती है। यहाँ बैठा हुआ बुध विद्या प्राप्ति के संबंध में आमतौर पर अच्छा फल ही देता है। यदि वह व्यक्ति अध्यापक के तौर पर कालेज या स्कूल में काम करे तो बृहस्पति के प्रभाव के कारण उसकी अच्छी प्रगति होती है और उसका सम्मान भी काफी होता है। मेरा अपना विचार है कि ग्यारहवाँ स्थान शनि की पक्की राशि होने के कारण यहाँ बैठा हुआ बुध आज के युग में कंप्यूटर आदि के क्षेत्र में भी व्यक्ति की प्रगति में काफी हद तक सहायक हो सकता है। इसके अलावा चार्टर्ड एकाउंटेंट, बिजनेस मैनेजमेंट आदि के कामों में भी बुध व्यक्ति को अच्छी दिशा में ले जाने का सूचक है। लाल किताब में यहाँ बैठे हुए बुध को 'फकीर की आवाज-आशीर्वाद' कहा है। इसका मतलब यह है कि उसके अचानक बोले या किसी को अचानक कहे शब्दों में एक विशेष प्रकार की शक्ति होती है। यदि वह किसी को भोलेपन में आशीर्वाद दे दे, तो इसके पूरा होने की संभावना बहुत होती है। दूसरी बात और है कि यदि वह किसी को बदुआ दे तब उसका बुरा असर भी अवश्य पड़ता है। दूसरे शब्दों में यहाँ के बुध के बारे में कहा गया है कि उसके मुँह से निकला वचन ब्रह्मवाक्य होगा। यहाँ शर्त केवल यह है कि वह अचानक निकला हुआ शब्द हो। तब उसका दूसरों पर उत्तम फल जरूर होगा। लाल किताब के अनुसार यदि बुध अच्छा न हो तो उसका पिता पर कुछ मात्रा में अशुभ असर पड़ सकता है, किंतु ये अशुभ असर कुछ हद तक उस व्यक्ति की संतान पर नहीं पड़ता। यहाँ पर बैठे बुध के अशुभ फल को दूर करने के के लिए गले में तांबे का पैसा पहनना बहुत अच्छा उपाय है। इससे उसके खजाने की यानी उसके पैसे की बरकत में बहुत हद तक सहायता मिलेगी। यहाँ पर बुध के साथ बृहस्पति का होना अच्छा फल देता है। क्योंकि, बुध बृहस्पति के ही पक्के घर में बैठा है। इससे व्यक्ति अपने जीवन में खुशहाल और भाग्यशाली होगा। इसका फल उस व्यक्ति के लिए उस समय और भी शुभ हो जाएगा, यदि उस व्यक्ति के घर बृहस्पतिवार के दिन कोई लड़का पैदा हुआ हो। यहाँ पर बुध के साथ सूर्य होने से विद्या प्राप्ति में बहुत सहायता मिलती है और उस व्यक्ति के लिए सरकारी कार्यालयों में काम करने की संभावना भी बहुत हद तक बढ़ जाती है। यदि इस घर में बुध और शुक्र दोनों बैठे हों, तो वह व्यक्ति जीवन के कुछ हिस्से में सरकारी नौकरी करने के बाद फिर अपना काम-धंधा करने की भी सोचता है। यदि ऐसी हालत में, उसके घर में जमीन में कोई भट्टी आदि बनाई जाए तो इसके फलस्वरूप दोनों का फल बहुत हद तक खराब हो जाएगा और ये उस परिवार की एक तरह से बरबादी का रूप होगा। इस घर में यदि बुध के साथ मंगल बैठा हो तो ये अच्छा फल नहीं देता। कई बार विद्या में रुकावट आने की संभावना रहती है और कुछ हालातों में व्यक्ति स्कूल में फेल हो सकता है अथवा वह आगे पढ़ने के विचार का ही त्याग कर सकता है। कुछ हालातों में उसकी संगति यानी जिन लोगों से उसकी दोस्ती या संपर्क होगा उनके कारण उसका समय नष्ट होने की संभावना भी रहती है। यहाँ पर बुध के साथ शनि हो तो ये कोई बहुत अच्छा फल नहीं देता। इसके कारण उस व्यक्ति की कोशिशों के अनुसार उसके जीवन में धन की तथा सफलता की प्राप्ति होने में अड़चनें आती हैं। इसी तरह यहाँ पर अगर बुध और राहु का योग बने तो ये बहुत अच्छा फल नहीं देता। इससे पिता पर भी किसी-न-किसी रूप में बहुत अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता। इस घर में बुध के साथ केतु का होना आदमी के जीवन में हमेशा ही एक तरह की हलचल पैदा करता है। उसके जीवन में कई प्रकार की भाग-दौड़ हमेशा गले पड़ी रहती है। ऐसे व्यक्ति की बहन के घर यदि लड़का हो तो बहुत जरूरी है कि उस लड़के की लंबी उम्र के लिए दान करना बहुत शुभ फल देगा।
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English:
For Gemini ascendants, Venus falls in the fifth house in Libra. Therefore, Mercury placed here gives the person excellent results. Its positive effects influence intelligence and education. Since the fifth house is the house of children, its results are also auspicious for offspring. However, if Saturn alone aspects this Mercury, there may be a possibility of a shortage of male children. According to Best Numerologer, Mercury here observes the eleventh house through its seventh aspect, which increases the gains obtained through intellect. Such a person is usually calm and possesses a good nature. For Gemini ascendants, the fifth house falls in Libra, and Venus, the lord of Libra, is strongly associated with knowledge. According to the Lal Kitab, the fifth house is a fixed house of Jupiter. Since the fifth house also governs learning, intellect, and knowledge, Mercury here brings praise from scholars, and the advice given by this person is highly beneficial for guiding others. Because Mercury is in Venus’s sign, the person develops a special liking for beautiful clothes, and their home is often well-decorated and maintained with cleanliness. Many believe that Mercury in this position may prevent the person from having long-term romantic relationships with other women. Mercury here also creates a strong interest in learning various branches of knowledge, including unconventional subjects. Sometimes, this interest can become slightly unusual. In certain cases, the person may develop excessive belief in supernatural powers or occasional illusions. Ancient astrologer Shri Kalyan Varma, in his work Saravali, notes that Mercury here creates a strong interest in mantra sciences and other tantric knowledge. This does not necessarily mean the person becomes a great tantrik, but they do have a strong belief and interest in mantras, tantra, and mystical tools. Astrologer Jaydev, author of Jatak Chandrika, also states that Mercury here particularly inclines the person toward mantra sciences. However, in some situations, if both Rahu and Saturn aspect this Mercury, the person may also believe in ghosts or feel that such supernatural powers can influence life. Acharya Varahamihir states that Mercury in this house makes a person act as a minister and gives advice to others. This does not necessarily mean the person becomes an official minister, but historically, a royal minister’s duty was to provide wise counsel to the king. Therefore, Mercury here can be interpreted as giving good advice or guidance to others. Similarly, astrologer Gunakar, in his Horamkand, also supports this view. According to the Kalpurush Kundli, the Sun is placed in the fifth house, so Mercury here, being in the Sun’s house, brings favorable results regarding the royal court or government. In today’s context, this can also mean that Mercury here increases the likelihood of a government job, and the person progresses well in such a career. Gopal Ratnakar similarly notes that Mercury here grants respect in government or official positions. Some astrologers believe that Mercury in this house increases the number of daughters or that offspring may mostly be female. For Gemini ascendants, Mercury in the fifth house in Venus’s sign may lead to such assumptions. However, according to the Kalpurush Kundli, the fifth house is in Leo, the Sun’s sign, so having Mercury here does not necessarily prevent male children. According to Shri Narayan Bhatt in Chamatkar Chintamani, daughters are certain, but male children may be delayed. Some ancient texts, like Garga Samhita, state that Mercury in the fifth house does not obstruct children if placed properly. If Mercury is ill-placed or afflicted by enemies’ aspects, it can cause the death of children or difficulties related to them. The influence of Mars or Ketu on Mercury can cause issues in the maternal uncle’s family. Generally, daughters are more likely than sons. Mercury in Jupiter’s fixed house does not create major difficulties. According to Arya texts, such a person is blessed with daughters and sons, experiences no shortage of happiness, and is devoted to pure gurus and Brahmins. Mercury here, influenced by Jupiter, purifies the mind and increases faith in good people. Mercury generally gives good results for education. A teacher in a school or college can progress well and gain respect due to Jupiter’s influence. In the modern context, Mercury here, being in Saturn’s fixed sign in the eleventh house, can support progress in areas like computers, business management, and accounting. The Lal Kitab calls Mercury here “the voice-blessing of a fakir,” implying that sudden words spoken by this person carry special power. If they bless someone innocently, it is likely to be fulfilled; if they curse, the negative effect is also impactful. Essentially, words spoken by Mercury here act like sacred words (Brahma-vakya) if spoken spontaneously. If Mercury is weak, the father may experience minor adverse effects, though this usually does not affect the children. To counteract negative results, wearing a copper coin around the neck is recommended, enhancing wealth and prosperity. Mercury with Jupiter gives favorable results, making the person happy and fortunate. If a boy is born on Thursday, this combination is even more auspicious. Mercury with the Sun enhances education and increases the likelihood of government work. Mercury with Venus indicates that the person may pursue both government jobs and independent business during life. However, Mercury with Mars is not favorable and can cause obstacles in education, sometimes leading to school failure or abandoning studies. Associations with friends or contacts may also waste time. Mercury with Saturn produces hurdles in wealth and success, while Mercury with Rahu is unfavorable and may reduce paternal influence. Mercury with Ketu creates restlessness and continuous activity. For example, donating for the longevity of a nephew in the sister’s family yields positive results.
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