Hindi:
वृष लग्न वालों के लिए दसवें स्थान में कुंभ राशि पड़ती है, जो शनि की मूल-त्रिकोण राशि है। इस घर में बैठा हुआ शुक्र शनि के शुभ फल ग्रहण करता है। शुक्र जो दूसरे घरों में भोग-विलास का कारक होता है, इस घर में आकर विशेष तौर से संजीदा हो जाता है। उसमें विशेष प्रकार की गंभीरता पैदा होती है। ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रंथ 'सारावली' में कहा गया है कि इस घर में शुक्र होने से वह व्यक्ति अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध होता है। यहाँ पर शुक्र व्यक्ति की विद्या के लिए अच्छा फल ही देता है। देखने में आता है कि ऐसे व्यक्ति वैज्ञानिक व तकनीकी शिक्षा प्राप्त करते हैं। इसके अलावा उन लोगों की जिन कामों में विशेष रुचि हो सकती है या जीवन में जो काम उनके लिए शुभ हो सकते हैं, उनमें गायन, वादन, रिकार्डिंग, सिनेमा व्यवसाय, रसायनशास्त्र, भौतिकशास्त्र, फोटोग्राफी, मोटर ड्राइविंग आदि व्यवसाय आते हैं। यहाँ पर शुक्र ज्योतिष का भी कारक है। शायद शनि महाराज की राशि में आकर शुक्र राक्षसों का गुरु होने के गुणों को अच्छे काम में लगाना चाहता है। लेकिन, ऐसे व्यक्ति जब ज्योतिष को व्यवसाय के रूप में लेते हैं तो उनके मन में पैसे के बारे में लालच अवश्य होता है। ऐसा होना बड़ी कुदरती बात है, क्योंकि यहाँ पर शुक्र शनि की राशि में है और शनि अपनी मेहनता का फल अवश्य देता है। जब व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में एक ठीक पात्र है तो शनि उसको शुभ फल देने की पूरी कोशिश करता है। इस स्थान में शुक्र होने से नौकरी के लिए आमतौर पर अच्छा फल ही मिलता है किंतु वह व्यक्ति अपनी नौकरी की आमदनी से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। इसलिए कहीं-न-कहीं उनके मन में अपना व्यवसाय करने की भावना हमेशा बनी रहती है। इस स्थान में शुक्र होने से व्यक्ति के जीवन में अपने स्थान से दूसरे शहर या दूसरे देश में जाने के मौके भी आते हैं। कई बार मेरे अपने देखने में आया है कि यदि वह व्यक्ति अपना स्थान छोड़कर किसी दूसरी जगह अपना व्यवसाय करे, तो यह उसके विकास के लिए शुभफल देता है। लुधियाना के सर्वश्रेष्ठ अंकशास्त्री के अनुसiर इसका हेतु यह है कि दसवें स्थान में शनि की राशि में बैठा हुआ शुक्र, शनि के प्रभाव में पूरी तरह आता है और यदि हम दसवें घर में शनि को जीवित ग्रह की तरह देखें तो यहाँ शनि का संबंध अपनी तीसरी दृष्टि से बारहवें घर से हो जाता है। बारहवाँ घर जो कि परदेश या विदेश का कारक है, जब इस शुक्र का प्रभाव बारहवें स्थान में पड़ता है तो यह शुक्र के लिए बहुत शुभ हो जाता है। इसका कारण यह है कि काल-पुरुष कुंडली में मीन राशि आती है। यहाँ पर शुक्र उच्च राशि का हो जाता है। हमारे बहुत से प्राचीन ज्योतिषियों का मत है कि इस स्थान में शुक्र होने से वाहन का सुख प्राप्त होता है। इसके बारे में ज्योतिषी गोलप का विचार है कि वह व्यक्ति वाहनों का स्वामी होता है। एक दूसरे ज्योतिषी गोपाल रत्नाकार का विचार है कि ऐसा व्यक्ति वाहनों से समृद्ध होता है। यहाँ पर मैं वाहन की परिभाषा को और स्पष्ट करना चाहता हूँ। वास्तव में शनि ग्रह उन वाहनों का कारक है जिनसे धन कमाया जाता है। यानी ऐसे वाहन जो किराए पर दिए जाते हैं जैसे-ट्रक, टैम्पो आदि हैं। यह वाहन केवल शनि के अधिकार में आते हैं, लेकिन अपना निजी मोटरसाइकिल, कार आदि वाहन शुक्र और शनि दोनों के अधिकार में आते हैं। यहाँ पर शुक्र होने से व्यक्ति को अपना वाहन जल्दी प्राप्त होने की संभावना रहती है। एक दफा वाहन खरीदने के बाद वह जीवन-भर वाहन का सुख प्राप्त करता है व एक के बाद दूसरा वाहन अच्छे स्तर का होता जाता है। 'चमत्कार चिंतामणि' में कहा गया है कि यहाँ शुक्र होने से व्यक्ति बहुत आडंबर करता है। लेकिन प्राचीन काल के एक दूसरे ज्योतिषी वैद्यनाथ का मत है कि यह शुक्र व्यक्ति को संन्यासी बनाता है। मेरे विचार में, यह दोनों मत वास्तविकता से काफी दूर हैं। शनि अपने आप में किसी भी प्रकार के आडंबर का कारक नहीं है। जब शुक्र शनि की राशि में बैठता है, तो उसमें आडंबर करने की या दुनियावी तौर पर दिखावा करने की इच्छा बढ़ने की बजाय कम होने की संभावना ज्यादा होती है। किंतु, यह संभावना इतनी ज्यादा भी नहीं कि वह व्यक्ति संन्यासी ही हो जाए। यहाँ पर भोग-विलास के कारक शुक्र का संजीदा होना तो ठीक है, लेकिन संन्यासी हो जाना ठीक नहीं लगता। हाँ, यह बात जरूर है कि व्यक्ति में एक विशेष प्रकार की गंभीरता का दृष्टिकोण जरूर पैदा होता है। एक अन्य प्राचीन ज्योतिष-ग्रंथ 'जातक चंद्रिका' का वर्णन काफी हद तक ठीक लगता है। उसमें कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति पवित्र चित्त का और सद्विचारों वाला होता है। लाल किताब में इस स्थान के शुक्र को 'धर्ममूरत' कहा गया है। लेकिन, धर्ममूरत के साथ यह वर्णन भी आता है कि यहाँ बैठे शुक्र में शनिवार का असर आने से से शुक्र में वह भोली युवती का स्वभाव नहीं रहता, मगर उसमें शनि का स्वभाव यानी शैतानी, चालाकी और होशियारी भी शामिल हो जाती है। यह होशियारी उस आदमी के जीवन में उन्नति करने में सहायक होगी। लेकिन, यदि वह व्यक्ति अपने चाल-चलन को ठीक न रखे तब इसका फल बहुत बुरा भी हो सकता है। कहा गया है- "सदा फूल औरत जवानी पे मरता या खाली औलाद पीरी तरसता" यदि ऐसा आदमी बेकार की खूबसूरत औरतों के पीछे भागे तो ये उसकी औलाद पर बुरा असर देगा और वह पीरी यानी वह अपने बुढ़ापे में तरसता हुआ अथवा औलाद से दुखी होकर मरेगा। यहाँ पर यदि शनि भी अच्छा हो तो ऐसे व्यक्ति की औरत के होते हुए, उसके जीवन में कभी कोई दुर्घटना नहीं होगी। मान लीजिए कि पति-पत्नी मोटर कार या बस में जा रहे हैं तो औरत के साथ होने से उसके साथ कोई भी हादसा नहीं होगा। ऐसे व्यक्ति का मकान आमतौर पर अच्छा होता है। उसके लिए शुक्र का फल और भी शुभ हो जाएगा यदि वह व्यक्ति अपने घर की पश्चिमी दीवार को कच्ची रखे। यदि ऐसा न हो सके तो पश्चिमी दीवार के पास थोड़े हिस्से को कच्चा रखे। कच्चा रखने से मतलब कच्ची मिट्टी से है क्योंकि, पश्चिमी दीवार शनि की कारक है और मिट्टी का कारक शुक्र है। इस तरह करने से दोनों का शुभ असर बहुत प्रबल हो जाएगा। जिससे परिवार को धन-दौलत का सुख पूरी तरह प्राप्त होगा और वह व्यक्ति अपने बुढ़ापे में भी पूरी तरह से आराम पाएगा। पंजाब के सर्वश्रेष्ठ अंक विशेषज्ञ के अनुसार इशारे के तौर पर कहा गया है कि इस घर में शुक्र होने से पत्नी, भाई से अपनी बात मनवाने में सफल रहती है। मेरे अपने तजुर्बे के अनुसार देखने में आता है कि कई बार व्यक्ति की शादी ऐसे घर में होती है जिनकी आर्थिक स्थिति उससे अच्छी हो। शायद इस कारण से भी घर में स्त्री की ज्यादा चलती है। इस स्थान में शुक्र के साथ दूसरे गृह आने से शुक्र के फल में बहुत अंतर पड़ जाता है। यदि इस जगह शुक्र के साथ बृहस्पति हो तो वह धन-दौलत के लिए बहुत अच्छा फल नहीं देता। यह ठीक है कि उसका अपना कमाया हुआ धन तो बरबाद न होगा, लेकिन अपने परिवार के धन का उसको कोई लाभ नहीं होगा। यदि ऐसा व्यक्ति अपने मन में धार्मिक विश्वास न रखता हो तो उसका धन हवा की तरह आता है और हवा की तरह ही चला जाता है। इससे भाइयों के साथ भी उसके संबंध अच्छे नहीं रहते। शुक्र के साथ सूर्य का फल शुक्र को और कमजोर कर देता है। शायद इसका कारण यह है कि शुक्र के साथ बैठा हुआ सूर्य खुद पीड़ित अवस्था में है, क्योंकि वह अपने शत्रु शनि की राशि में बैठा है। लाल किताब में लिखा है कि ऐसा व्यक्ति राजा होते हुए भी परदेश में ठोकर खाए। यानी उसको अपने कामों में बहुत सफलता नहीं मिलती। इस दोष को दूर करने के लिए साँप को दूध पिलाना शुभ फलदायी हो जाता है। यहाँ पर चंद्र के साथ शुक्र का होना भी अच्छा फल नहीं देता। व्यक्ति की माता और उसकी पत्नी के संबंध बहुत अच्छे नहीं रहते। अगर उनके संबंध ठीक हों तो दोनों में से एक की सेहत पर किसी-न-किसी तरह बुरा असर पड़ता है। इस घर में शुक्र के साथ मंगल का होना शुभ असर नहीं देता। ऐसा व्यक्ति कई बार छोटी-सी बात पर लंबा-चौड़ा झगड़ा खड़ा कर लेगा। यदि दोनों पर किसी अशुभग्रह की दृष्टि हो तो कई बार उस व्यक्ति की पत्नी को आग से किसी अंग के जलने का डर भी रहता है या किसी प्रकार की बीमारी होने का डर रहता है। यहाँ पर शुक्र के साथ बुध का होना शुक्र की शक्ति को और बढ़ा देता है। ऐसे व्यक्ति की सेहत ठीक रहती है और अपने फैसले करने के लिए उसकी बुद्धि तेज होती है। शुक्र के साथ शनि की युति के बारे में लाल किताब में कहा गया है कि इस घर में दोनों होने से शुक्र यानि औरत शनि यानि शराब इन्सान को ऐय्याश बना देता है, ऐसे व्यक्ति में अपनी जवानी में ऐश और प्रेम का होना संभव होगा जिससे उस व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। पैसे के लिए भी दोनों का फल शुभ रहता है। इस घर में शुक्र के साथ राहु का होना उस व्यक्ति की पत्नी की सेहत के लिए अच्छा फल नहीं देता। उस व्यक्ति के जीवन में ऐशो-आराम की चीजों की कमी भी रहती है। जब शुक्र और केतु दोनों इस भाव में हों तो उस आदमी के जीवन में कई प्रकार की तब्दीलियाँ आती हैं। उसके अपने काम में अड़तालीस साल तक कोई विशेष स्थिरता नहीं रहती। लाल किताब में कहा गया है कि जब शुक्र दसवें घर में हो और ऐसा पुरुष या उसकी पत्नी किसी दूसरे व्यक्ति से शारीरिक संबंध रखे तो इससे संतान, विशेषकर पुत्र की उत्पत्ति में बाधा हो सकती है। यदि शुक्र औलाद के लिए अशुभअसर दे रहा हो तो ऐसी हालत में पति-पत्नी दोनों अपने गुप्त अंग को दही से साफ किया करें, तो इससे मन की शांति भी होगी व सेहत के लिए अच्छा असर पड़ेगा और औलाद के लिए भी इससे बाधा दूर हो जाएगी। लाल किताब में यह वर्णन भी आता है कि ऐसा व्यक्ति बहुत बीमार हो और, मौत और जीवन के बीच जूझ रहा हो तो काली कपिला गाय के दान करने से उसकी आयु का फैसला हो जाएगा। या तो वह ठीक हो जाएगा अथवा उसकी जीवन-लीला समाप्त हो जाएगी।
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English:
For Taurus ascendant, the tenth house falls in Aquarius, the Mool-Trikon sign of Saturn, and Venus placed here receives Saturn’s auspicious influence. Venus, which is normally a significator of luxury and sensual pleasures, becomes serious and disciplined in this house, developing a special kind of maturity. The classical text Saravali states that Venus in this house makes a person famous for intelligence and gives excellent results for knowledge, often guiding them toward scientific and technical studies. Such natives also show interest or success in fields like singing, music, recording, cinema, chemistry, physics, photography, and motor-related professions, and Venus here can also make one inclined toward astrology. By entering Saturn’s sign, Venus (the preceptor of Asuras) tends to use its qualities for constructive purposes. According to Best Numerologer in Ludhiana However, when these individuals practice astrology professionally, a slight greed for money is often seen due to Saturn’s influence, and although Venus generally gives good results in jobs, the person rarely feels satisfied with the income and maintains a strong desire to start their own business. This placement often gives opportunities for relocation to another city or country, and experience shows that settling elsewhere for career growth proves beneficial because Venus fully comes under Saturn’s influence, and Saturn’s third aspect on the twelfth house enhances foreign connections. The twelfth house corresponds to Pisces in the Kalpurush Kundli, where Venus becomes exalted, giving further auspicious results. Ancient astrologers also consider this position favorable for vehicle comforts; some say the native becomes the owner of vehicles, while others say they prosper through vehicles. Saturn rules vehicles used for earning, such as trucks and tempos, but personal vehicles like motorcycles and cars fall under both Venus and Saturn, so the person is likely to acquire their vehicle early and enjoy increasingly better vehicles throughout life. Chamatkar Chintamani claims Venus here makes a person showy, while Vaidyanath says it creates an ascetic, but both views seem inaccurate because Saturn has no connection with showiness, and Venus in Saturn’s sign reduces the desire for display rather than increasing it, though it does produce seriousness without making the person renounce worldly life. Jatak Chandrika describes such a person as pure-hearted and noble, and Lal Kitab calls Venus in this position “Dharmamurti,” though it also says that Saturn removes Venus’s innocent, youthful nature and adds cleverness, cunningness, and alertness, which can help in progress but can also cause harm if misused, especially in matters of lust, which can negatively affect children and bring suffering in old age. If Saturn is strong, the presence of the wife protects the native from accidents. Such people usually have good homes, and the results of Venus become stronger if the western wall of the house is kept unplastered or at least a part of it remains raw, because the west belongs to Saturn and raw earth belongs to Venus, increasing prosperity and comfort even in old age. According to Lal Kitab, the wife of such a native often influences her husband’s brother, and many times the native marries into a financially better family, leading to greater influence of the wife in the household. According to Punjab Best Numerologist When other planets join Venus here, results vary: with Jupiter, the native’s own earnings stay safe but he gets no benefit from family wealth and may face financial instability and poor relations with brothers if lacking religious faith; with the Sun, Venus becomes weak as the Sun suffers in Saturn’s sign, and the native struggles in foreign places, for which feeding milk to snakes is a remedy; with the Moon, the mother and wife either face conflicts or health problems; with Mars, small issues turn into major disputes, and the wife may suffer burns or illnesses if afflicted; with Mercury, Venus’s strength increases, giving strong health and sharp decisions; with Saturn, the native may indulge in pleasure in youth without major harm, and finances remain favorable; with Rahu, the wife’s health suffers and comfort decreases; with Ketu, life undergoes many changes and stability comes after age 48. Lal Kitab warns that if Venus is afflicted and either spouse engages in immoral relations, it harms progeny, especially sons, and purifying the private parts with curd helps restore peace, health, and fertility. Another instruction says that if the person is critically ill, donating a black Kapila cow determines whether the native survives or leaves the body.
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