Hindi:
वृष लग्न वालों के लिए नवम भाव में उसके मित्र शनि की मकर राशि आती है। इस राशि में आकर शुक्र जो दूसरे कई घरों में आकर हमारे जीवन को खुशहाल बना देता है तथा हमें भोग के पदार्थ कम मेहनत से ही प्राप्त करवाता है, उसका फल इस घर में नहीं मिलता। शनि मेहनत के बगैर किसी को भी कुछ नहीं देता। यही कारण है कि वृष लग्न वालों के लिए नवम भाव में शुक्र होने से व्यक्ति अपने शारीरिक श्रम द्वारा ही भाग्य की उन्नति कर सकता है। यहाँ बैठा हुआ शुक्र सातवीं मित्र दृष्टि से तीसरे भाव को देखता है, इसलिए कुछ कठिनाइयों के साथ ही भाई-बहनों का सुख हालातों में यह जरूरी नहीं है, कि भाई-बहनों के साथ संबंध अच्छे ही हों। सुख मिलता है। है। कुछ वृष लग्न वालों के लिए शुक्र लग्नेश होकर भाग्य स्थान में बैठ जाता है। इसलिए देखने में आया है कि बहुत से व्यक्तियों का भाग्य विवाह होने के बाद उदय होता है। लुधियाना के सर्वश्रेष्ठ अंकशास्त्री के अनुसर यदि व्यक्ति को पैसे की जरूरत भी हो तो अपनी पत्नी द्वारा या दूसरी स्त्रिर्यो से भी सहायता मिलने का योग बन जाता है। यदि शुक्र पर किसी अशुभ ग्रह की दृष्टि न. हो तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सम्मान मिलता है। यह सबकुछ उसकी स्त्री के जीवित रहने तक ही रहता है। जब स्त्री की मृत्यु होती है तो उस व्यक्ति का सब वैभव नष्ट होने की नौबत आ जाती है। शुक्र अपने आप में भोग-विलास और मस्ती का कारक ग्रह, जब इस शनि की राशि में बैठ जाता है तो उसके स्वभाव में कुछ बनियापन आ जाता है। अब वह एक प्रकार से वाणिज्य, व्यापार में रुचि रखने की कोशिश करता है। जिसके फलस्वरूप वह जीवन को पूरी तरह भोगने की बजाय अपना ज्यादा समय पैसा कमाने के लिए व्यतीत करता है। इसके बारे में चमत्कार चिंतामणि में जिक्र आता है कि इससे दूसरे लोग कर्जा लेते हैं और वह उनसे ब्याज लेता है। वास्तव में, शुक्र इस तरह का सूदखोर तो नहीं बनता किंतु फिर भी किसी हद तक उसमें पैसे के बारे में एक प्रकार की लालसा जरूरत से ज्यादा पैदा हो जाती है। कुछ हालातों में देखा गया है कि यहाँ पर शुक्र होने से आदमी की शादी अपनी आयु से ज्यादा आयु वाली स्त्री से हो सकती है और संभवतः वह अधिक सुंदर भी न हो। जिसके फलस्वरूप, ऐसा व्यक्ति अपने से अधिक उम्रवाली या असुंदर स्त्रियों में रुचि रखता है। इसका कारण यह है कि यहाँ शुक्र एक युवती का कारक है जो शनि की राशि में आकर अपनी सुंदरता तथा यौवन को किसी हद तक कम कर लेता है। इस घर में शुक्र होने से व्यक्ति मेहनत करता है, कई बार उसका धन बेकार बातों में नष्ट होने की संभावना रहती है। बृहद् यवन जातक नामक ग्रंथ में जिक्र आता है कि ऐसा व्यक्ति पिता से प्राप्त हुए धन का खर्च तीर्थ यात्रा, उत्सव, साधु-संतों तथा अतिथियों पर खर्च करता है। यह ठीक है कि उसके धन खर्च के साधन अच्छे हो सकते हैं, किंतु कुछ हालातों में उसका धन ऐसे कामों में भी खर्च होता है जो खर्च उसे मजबूरी में करना पड़ता है। कुल मिलाकर उस व्यक्ति का धनवान होना जरूरी नहीं है, लेकिन उसके पास अच्छे पैसे होते हुए भी वह परिश्रम करता ही रहता है। शायद इसका कारण यह है कि उसमें और धन कमाने की लालसा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। लाल किताब के अनुसार कुंडली का नौंवा घर वृहस्पति का पक्का घर है। इसलिए शुक्र का शत्रु के पक्के घर में आना शुक्र के फल को काफी हद तक जला भी देता है। लाल किताब में कहा गया है कि यहाँ पर शुक्र काली आँधी की तरह व्यक्ति को परेशान करता है। इस परेशानी के कई किस्म के कारण हो सकते हैं। जैसे शादी यदि मर्जी से करना चाहे तो बड़े-बुजुर्गों की तरफ से व्यक्ति को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। भाई बंधुओं की ओर से भी मुश्किलें खड़ी ही रहती हैं। लाल किताब में जिक्र आता है कि पच्चीस वर्ष की आयु में ऐसा व्यक्ति शादी करे या गाय खरीदे या खेती-बाड़ी से संबंध रखने लगे, तो उसे हर प्रकार की हानियों और परेशानियों से गुजरना पड़ेगा। यहाँ पर शुक्र का अपना फल और भी नष्ट हो जाएगा यदि उस व्यक्ति के घर में उसकी सास या साली रहना शुरू कर दे। इस घर में यदि शुक्र का अशुभ प्रभाव पत्नी के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है तो वह व्यक्ति पत्नी के हाथ में चाँदी की चूड़ी पहनाए जिसके ऊपर का हिस्सा लाल रंग का हो तथा उस चूड़ी का निचला भाग चाँदी हो। कई बार शुक्र जब धन के लिए यहाँ अशुभ असर दे रहा हो तो उसको दूर करने के लिए नीम के वृक्ष में चाँदी के चौकोर टुकड़े दबाए, धन के बारे में अच्छा फल देगा। नौंवे घर में शुक्र के साथ बृहस्पति होने से दोनों का असर शुभ हो जाता है। तीर्थ-यात्रा के बहुत अवसर आते हैं और धन-दौलत के लिए अच्छा ही रहता है। इसका कारण यह है कि नौवाँ घर बृहस्पति का पक्का घर है। बृहस्पति अपने पक्के घर में आए हुए शुक्र को शुभ फल ही देता है। यहाँ पर शुक्र के साथ सूर्य का होना धन-दौलत के लिए बहुत शुभ माना गया है। लेकिन इससे उस व्यक्ति के जीवनसाथी पर कुछ-न-कुछ अशुभ असर रहता है। यदि शुक्र के साथ चन्द्र इस घर में आ जाए तो शुक्र का फल बहुत शुभ नहीं रहता। इससे थोड़ी-बहुत पारिवारिक कलह रहने की संभावना रहती है। यदि व्यक्ति गले में चाँदी की चेन पहने तो इससे शुक्र को बल मिलेगा और चन्द्र और शुक्र दोनों मिलकर अच्छा फल देंगे। इस घर में शुक्र के साथ मंगल का होना उस व्यक्ति के जीवनसाथी की सेहत के लिए अच्छा फल नहीं देता। यदि वह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के लिए या अपनी पत्नी के स्वास्थ्य के लिए, पत्नी के भाई या भाईयों से मिली खाने की चीजें खाए तो यह उसके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा फल देगा। सिर्फ खाने की चीजें ही नहीं यदि उनके द्वारा मिली हुई दवाइयाँ भी खाए तो वह उसके स्वास्थ्य को बहुत अच्छा कर देंगी। शायद लाल किताब का तर्क यह है भी कि यहाँ मकर राशि में मंगल आ चुका है। इसलिए मंगल का असर शुक्र में मिला दिया जाए तो वह शुक्र के फल को किसी हद तक ठीक कर देगा। नौवें घर में शुक्र, बुध का इकट्ठा होना कोई बहुत बुरा फल नहीं देता। लेकिन, यदि पच्चीस और सत्ताईस साल की आयु में उस व्यक्ति के कन्या संतान पैदा हो तो उसका असर परिवार पर अच्छा नहीं होगा और किसी हद तक उसकी आर्थिक स्थिति पर भी इसका अशुभ प्रभाव होगा। यहाँ पर शुक्र के साथ शनि का होना बहुत शुभ फल देता है। इस योग से स्त्री व लक्ष्मी का सुख मिलता है। उस व्यक्ति की जायदाद बढ़ने के अवसर भी जीवन में आएँगे। शायद यहाँ पर भी यही कारण है कि इस मकर राशि में शनि अपनी राशि का होने से शुक्र का मित्र होने के कारण शुक्र के फल को काफी हद तक शुभ कर देता है। यहाँ पर शुक्र के साथ राहु का होना एक प्रकार से मिट्टी भरी काली आँधी है। जिसका असर भाग्य पर अशुभ ही रहता है, किंतु उसकी इज्जत और शौहरत जरूर कायम रहती है। यहाँ पर शुक्र के साथ केतु का होना दोनों के फल को शुभ कर देता है। इसका कारण यह है कि काल-पुरुष कुंडली में या लाल किताब के अनुसार नौवें घर पर बृहस्पति का अधिकार है। केतु यहाँ पर बृहस्पति का चेला होने के कारण अपने फल को अच्छा कर लेता है, और वह शुक्र की पूरी तरह से सहायता करता है। इसका शुभ फल उसके धन व पुत्रों पर पड़ता है।
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English:
For individuals with Taurus Ascendant (Vrisha Lagna), the Ninth House, ruled by its friend Saturn (Capricorn/Makara Rashi), requires the Ascendant Lord Venus to attain fortune primarily through hard physical labor, contradicting its usual role of granting easy comforts, as Saturn allows nothing without effort. The placement of the Lagnesh in the House of Fortune is often observed to bring a rise in luck after marriage, with the spouse or other women potentially offering financial support, and the native typically earning honour and respect in life—though this prosperity is said to be vulnerable upon the demise of the wife. Venus in Capricorn instills a mercantile nature, shifting the focus from pleasure to the ambition of accumulating wealth, leading the person to spend more time earning money than enjoying life, a tendency described by the Chamatkar Chintamani as a greater-than-necessary desire for money. According to Best Numerologer in Ludhiana This position may lead to marriage with an older or less beautiful partner, prompting the native's interest in similar types of women, as Venus's youthfulness is somewhat diminished in Saturn's sign; furthermore, wealth may be expended on good causes like pilgrimages and guests, but also on unavoidable, wasteful expenditures, leaving the person hardworking despite having sufficient funds. The Lal Kitab views the 9th house as Jupiter's territory, where Venus is an enemy, likening its effect to a "black dust storm" (Kali Aandhi) that troubles destiny and causes issues with elders and siblings, specifically advising against marriage, buying a cow, or engaging in farming at the age of 25 to avoid losses, and suggesting specific remedies like the wife wearing a red and silver bangle or burying silver pieces under a Neem tree for financial improvement. Conjunctions are highly influential: Jupiter and Saturn make Venus auspicious, promoting pilgrimage and wealth; Sun is good for wealth but bad for the spouse; Moon causes family conflict (remedied by a silver chain); Mars is bad for the spouse's health (remedied by consuming food/medicine from the wife's brother); Mercury is generally fine unless a girl child is born between 25-27, which negatively impacts finances; Rahu maintains honour but is otherwise inauspicious for fortune; and Ketu, being Jupiter's disciple, assists Venus, giving auspicious results for wealth and children.
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